दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) विवेक भगत (Vivek Bhagat) की शिकायत पर पत्रकारों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने मामले में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) को नोटिस जारी किया है। दो पत्रकारों ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया था। यह मामला तब सामने आया, जब पत्रकारों और CJP के कुछ अन्य सदस्यों ने ACP विवेक भगत पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इसके बाद अधिकारी ने संबंधित पत्रकारों के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोप में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया।
FIR रद्द करने की मांग लेकर हाई कोर्ट पहुंचे पत्रकार
ACP विवेक भगत की शिकायत पर दर्ज FIR को चुनौती देते हुए दो पत्रकारों ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं ने मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है, ताकि मामले में उसका पक्ष सामने आ सके। हालांकि, फिलहाल कोर्ट ने आपराधिक जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
पहले ACP पर लगाए गए थे यौन उत्पीड़न के आरोप
इस मामले की पृष्ठभूमि में पत्रकारों और CJP के अन्य सदस्यों की ओर से ACP विवेक भगत पर लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोप हैं। इसके बाद ACP की ओर से पत्रकारों के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोप में शिकायत दर्ज कराई गई। दोनों पक्षों से जुड़े आरोपों के बीच मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में है। आरोपों की सत्यता और FIR की वैधता पर अंतिम स्थिति अदालत की आगे की सुनवाई और जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगी।
जस्टिस मिनी पुषकरणा ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि फिलहाल अदालत केवल नोटिस जारी कर रही है और दिल्ली पुलिस का जवाब आने के बाद मामले के गुण-दोष के आधार पर सुनवाई की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। अदालत ने कहा, “मैं अभी सिर्फ नोटिस जारी कर रही हूं। जवाब आने के बाद मैं मामले के मेरिट्स के आधार पर सुनवाई करूंगी। जांच जारी रहेगी।”
क्या है ACP विवेक भगत और पत्रकारों के बीच पूरा विवाद?
दिल्ली हाई कोर्ट ने जांच पर रोक लगाने से किया इनकार, वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने मांगा था अंतरिम आदेश; मामले में 3 अक्टूबर के प्रदर्शन से जुड़ा है विवाद नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट में ACP विवेक भगत की शिकायत पर पत्रकारों के खिलाफ दर्ज FIR का मामला चर्चा में है। पत्रकारों ने प्राथमिकी को चुनौती देते हुए जांच पर रोक लगाने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान पत्रकारों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर ने अदालत से जांच रोकने के लिए सख्त अंतरिम आदेश पारित करने की अपील की। हालांकि, अदालत ने इस चरण में राहत देने से इनकार कर दिया। मामले में दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया गया है और जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है।
3 अक्टूबर के प्रदर्शन से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा मामला 3 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर के पास बूटा सिंह चौक पर हुए एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। उस दौरान ACP विवेक भगत कानून-व्यवस्था की ड्यूटी पर तैनात थे। प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार ने उन पर यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे। महिला पत्रकार की शिकायत के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बीच उनके साथ कथित तौर पर अनुचित व्यवहार किया गया। इस शिकायत की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई थी।
ACP की शिकायत पर पत्रकारों के खिलाफ FIR
दूसरी ओर, ACP विवेक भगत ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ जातिसूचक टिप्पणियां की गईं और उनके आधिकारिक काम में बाधा पहुंचाई गई। उनकी शिकायत के आधार पर संसद मार्ग पुलिस थाने में 13 अक्टूबर को FIR दर्ज की गई। इस मामले में एक महिला पत्रकार, एक अन्य पत्रकार और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ आरोप दर्ज किए गए। प्राथमिकी में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराएं भी लगाई गईं।
पत्रकार रोजी का दावा- यौन उत्पीड़न की शिकायत के बदले दर्ज हुई FIR
दिल्ली में ACP विवेक भगत और पत्रकारों से जुड़े विवाद में स्वतंत्र पत्रकार रोजी ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (FIR) अधिकारी के विरुद्ध यौन उत्पीड़न की शिकायत का बदला लेने के लिए दर्ज कराई गई है। रोजी ने अपने खिलाफ लगाए गए जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोपों से भी इनकार किया है। उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर FIR और उससे जुड़ी आगे की कार्यवाही रद्द करने की मांग की है। रोजी के साथ मौजूद एक पुरुष पत्रकार ने भी FIR को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया है। दोनों ने अदालत से मामले में राहत देने की अपील की है।
पत्रकार रोजी ने क्या आरोप लगाए?
अपनी याचिका में रोजी ने दावा किया है कि 3 अक्टूबर को बूटा सिंह चौक पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान ACP विवेक भगत ने उनके साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया था। उन्होंने इस संबंध में अधिकारी के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई थी। रोजी का आरोप है कि उनकी शिकायत के बाद उनके खिलाफ जातिसूचक टिप्पणी करने के आरोप में FIR दर्ज की गई। उन्होंने इसे अपनी शिकायत के प्रतिशोध में की गई कार्रवाई बताया है। हालांकि, ये याचिकाकर्ता के आरोप हैं और इन पर अदालत का अंतिम निर्णय अभी नहीं आया है।
FIR रद्द करने और गिरफ्तारी से राहत की मांग
रोजी ने हाई कोर्ट से अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने के साथ उससे जुड़ी आगे की आपराधिक कार्यवाही समाप्त करने का अनुरोध किया है। इसके अलावा, उन्होंने गिरफ्तारी और अन्य कठोर कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा देने की भी मांग की है। उनके साथ मौजूद पुरुष पत्रकार ने भी FIR को चुनौती दी है। दोनों की याचिकाओं पर अदालत ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m

