लखनऊ. पश्चिम बंगाल में चुनाव होने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी का पूरा फोकस उत्तर प्रदेश पर हो गया है. बंगाल में नए मुख्यमंत्री के शपथ के बाद पूरा संगठन अब यूपी में जमीनी स्तर पर उतरेगा. इसी कड़ी में एक बार फिर से मंत्रिमंडल विस्तार (UP Cabinet Expansion) को लेकर चर्चाएं उठ रही है. माना जा रहा है कि बंगाल में नए सीएम के शपथ लेने के बाद यूपी में कभी भी कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है.

बता दें कि मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा यूपी भाजपा को नया अध्यक्ष मिलने के बाद से और भी ज्यादा हो रही है. माना जा रहा है कि सरकार पीडीए समीकरण को दुरुस्त कर सकती है. मंत्रीमंडल विस्तार को लेकर दिल्ली से लखनऊ तक मंथन चल रहा है. मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड के आधार पर तो कई को संगठन में जिम्मेदारी मिलने की संभावना है. माना जा रहा है कि संभावित मंत्रिमंडल के फेरबदल में जातीय समीकरण पर चर्चा की जाएगी.

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मंत्रिमंडल में पिछड़े व दलित मंत्रियों का प्रतिनिधित्व व कद बढ़ाने पर मंथन किया जा रहा है. योगी कैबिनेट (Yogi Cabinet Expansion) में ऊर्जावान व युवा विधायकों को मौका मिल सकता है. पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी का समायोजन भी इस मंत्रिमंडल में हो सकता है. मंत्रिमंडल विस्तार में आधे दर्जन नए चेहरों को मौका मिलने के आसार दिख रहे हैं.

योगी कैबिनेट में अभी कुल 54 मंत्री हैं. जबकि संवैधानिक रूप से 60 मंत्रियों तक की गुंजाइश है. इसका मतलब योगी सरकार के पास 6 नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल करने का पूरा अवसर है. जिसके चलते सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर मंथन हुआ है. इस विस्तार के साथ-साथ कुछ मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी देकर मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है.