IIT रुड़की में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2026 (National Technology Day 2026) के अवसर पर आज “Responsible Innovation for Inclusive Growth” विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सूचना प्रौद्योगिकी, सुशासन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी, AI और Innovation केवल आधुनिक विकास के साधन नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक अवसर पहुंचाने का माध्यम बनने चाहिए.

बत्रा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य “Technological Antyodaya” है, जहां Technology का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचे. उत्तराखण्ड को Innovation Hub बनाने और युवाओं को Future-Ready Skills से जोड़ने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है. कार्यक्रम की अध्यक्षता IIT रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने की. जबकि UCOST के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे.

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बता दें कि भारत में हर वर्ष 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया जाता है. ये दिन वर्ष 1998 में किए गए पोखरण-II परमाणु परीक्षणों (Pokhran-II Nuclear Test) की ऐतिहासिक सफलता की याद में मनाया जाता है. राजस्थान के पोखरण परीक्षण क्षेत्र में 11 मई और 13 मई 1998 को किए गए इन परमाणु परीक्षणों ने भारत को वैश्विक स्तर पर तकनीकी और सामरिक शक्ति के रूप में स्थापित किया था.

पोखरण-II को “ऑपरेशन शक्ति” के नाम से भी जाना जाता है. इस अभियान के तहत कुल पांच परमाणु परीक्षण किए गए थे. इनमें से तीन भूमिगत परीक्षण 11 मई 1998 को और दो अतिरिक्त विखंडन परीक्षण 13 मई 1998 को किए गए. इन परीक्षणों में 45 किलोटन का थर्मोन्यूक्लियर उपकरण, 15 किलोटन का विखंडन उपकरण और 0.2 किलोटन का सब-किलोटन उपकरण शामिल था. इन सफल परीक्षणों के बाद भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया जिन्हें परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र माना जाता है.

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ऑपरेशन शक्ति में भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की महत्वपूर्ण भूमिका रही. वे उस समय देश के प्रमुख एयरोस्पेस वैज्ञानिकों में से एक थे और बाद में भारत के राष्ट्रपति भी बने. उस समय अटल बिहारी वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री थे. उन्होंने वर्ष 1999 में 11 मई को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस घोषित किया. इसका उद्देश्य विज्ञान, तकनीक और स्वदेशी नवाचारों को बढ़ावा देना था.