यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खुला पत्र लिखकर मछली भोज और माफिया से जुड़े आरोपों पर जवाब दिया है. उन्होंने मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत और उग्र बयानबाजी छोड़कर प्रदेश की समस्याओं पर ध्यान देने की अपील की.

सतीश सिंह, लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजनीति में मछली भोज को लेकर सरकार और कांग्रेस के बीच शुरू हुआ विवाद थम नहीं रहा है. गुरुवार को यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खुला पत्र लिखकर धार्मिक और जातिगत उग्र बयानों से प्रदेश का माहौल बिगड़ने का आरोप लगाया.

अजय राय ने कहा कि जनता ने मुख्यमंत्री को दूसरी बार प्रदेश की समस्याओं के निस्तारण के लिए सत्ता सौंपी है, न कि राजनीतिक विरोधियों पर व्यक्तिगत आरोप लगाने के लिए.

मछली भोज पर जवाब

अजय राय ने पत्र में कहा कि बीते दिनों अयोध्या में दर्शन के बाद मछली की दावत उड़ाने और माफिया के सामने थर-थर कांपने का आरोप लगाया गया था. उन्होंने कहा कि वह शाकाहारी हैं और जिस कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति का उल्लेख किया गया है, वह निषाद समाज के निमंत्रण पर आयोजित हुआ था.

उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के बाद आयोजकों ने अपने समाज के लिए भोज किया था. यह उनका संवैधानिक अधिकार था कि वे उसमें क्या खाएं. अजय राय ने चुनौती दी थी कि यदि उनके मछली खाने की कोई सत्य प्रमाणित तस्वीर या वीडियो उपलब्ध है तो उसे जनता के सामने लाया जाए, वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे.

अजय राय ने कहा कि उनकी चुनौती के पांच दिन बाद भी मुख्यमंत्री की ओर से कोई जवाब नहीं आया.

आरोपों पर उठाए सवाल

अजय राय ने कहा कि उनके दल और मातृ संगठन का तरीका जनता देख रही है कि आरोप लगाए जाते हैं और प्रमाण मांगने पर चुप हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ऐसी राजनीति नहीं करती और उसके नेताओं ने देश की आजादी तथा एकता के लिए अपने प्राणों की कुर्बानी दी है.

माफिया आरोप पर पलटवार

अजय राय ने कहा कि जहां तक माफिया के सामने डरने का सवाल है, उनके भाई स्व. अवधेश राय की हत्या के बाद उन्होंने किसी माफिया के सामने सिर नहीं झुकाया. उन्होंने कहा कि वह 32 वर्षों तक न्याय के लिए अदालतों में लड़ते रहे.

उन्होंने बताया कि इस दौरान उनकी सुरक्षा भी वापस ली गई. अप्रैल 2021 और सितंबर 2025 में उनकी सुरक्षा हटाई गई थी. अजय राय ने कहा कि सुरक्षा हटने के बावजूद न वह डरे और न ही न्याय की लड़ाई से पीछे हटे.

उन्होंने कहा कि उनके बारे में माफिया के सामने डरने का आरोप केवल झूठ नहीं, बल्कि न्याय के लिए चली लंबी लड़ाई का भी अपमान है.

उग्र बयान पर सवाल

अजय राय ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि वह लगातार इतने उग्र और व्यक्तिगत बयान किस आधार पर देते रहे हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने से पहले योगी आदित्यनाथ लोकसभा में अपनी सुरक्षा के सवाल पर भावुक हुए थे और सरकार से न्याय की मांग की थी.

अजय राय ने कहा कि सत्ता में रहते हुए मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि उनके शब्दों की जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होती है.

राज्यपाल से सलाह की बात

अजय राय ने कहा कि प्रदेश में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों सहित बड़ी संख्या में लोग अन्याय की शिकायत कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इन सवालों का जवाब विज्ञापनों से नहीं, बल्कि जमीन पर काम से मिलेगा.

उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्यपाल से भी कुछ सलाह लेने की बात कही. अजय राय ने कहा कि त्योहारों के दौरान चीनी, दाल, तेल और खाद्य पदार्थों के दाम कम रहें, इस पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए.

उन्होंने झूठी और अप्रमाणित बयानबाजी बंद कर प्रदेश की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देने की अपील की. साथ ही कहा कि यदि व्यक्तिगत आरोपों की राजनीति ही करनी है तो पद की गरिमा के लिए इस्तीफा दे देना चाहिए.

अजय राय ने कहा कि केवल भगवा वस्त्र पहन लेने से संत का आचरण सिद्ध नहीं होता. उनके मुताबिक संत की पहचान सत्य, संयम, करुणा और शांति से होती है.