अजयारविंद नामदेव, शहडोल। जिले में कुपोषण की स्थिति अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) में उपलब्ध 70 बिस्तरों के मुकाबले 77 गंभीर कुपोषित बच्चों का उपचार किया जा रहा है। एक ओर यह आंकड़ा जिले में कुपोषण की गंभीरता को उजागर करता है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चों को समय पर उपचार, पोषण आहार और चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराना राहत की बात है। 

ताजा आंकड़ों के अनुसार, 26 जून 2026 की स्थिति में शहडोल जिले के 6 एनआरसी केंद्रों में कुल 70 स्वीकृत बिस्तरों की क्षमता है, लेकिन इसके मुकाबले वर्तमान में 77 बच्चे जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। यानी उपलब्ध क्षमता से सात बच्चे अधिक भर्ती हैं। इससे स्पष्ट होता है कि जिले में कुपोषण की समस्या अभी पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी है और कई केंद्रों पर दबाव बढ़ा हुआ है। आंकड़ों के अनुसार जिला चिकित्सालय शहडोल स्थित एनआरसी में 20 में से 18 बच्चे भर्ती हैं, जबकि ब्योहारी, बुढ़ार और गोहपारू के एनआरसी में क्षमता से अधिक बच्चों का उपचार किया जा रहा है। जैसिंहनगर और सिंहपुर में कुछ बिस्तर अभी भी खाली हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर वहां अतिरिक्त बच्चों को भर्ती किया जा सकता है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रत्येक भर्ती बच्चे को चिकित्सकीय उपचार, संतुलित पोषण आहार, नियमित जांच और विशेषज्ञों की निगरानी में रखा जा रहा है, ताकि उनका स्वास्थ्य जल्द सुधर सके। विभाग द्वारा कुपोषण की रोकथाम के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य अमले के माध्यम से भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि कुपोषण से लड़ने के लिए केवल अस्पतालों में उपचार पर्याप्त नहीं है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पौष्टिक भोजन की उपलब्धता, गर्भवती एवं धात्री माताओं की देखभाल, बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच और जनजागरूकता बेहद जरूरी है। कुल मिलाकर, एनआरसी में बच्चों को बेहतर उपचार मिलना सकारात्मक पहलू है, लेकिन क्षमता से अधिक बच्चों का भर्ती होना इस बात का संकेत भी है कि जिले में कुपोषण की चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है और इसे जड़ से समाप्त करने के लिए सतत एवं प्रभावी प्रयासों की आवश्यकता है। 

अधिकारियों का कहना है कि बच्चों को कुपोषण से मुक्त करने के लिए हर संभव व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं, ताकि इन्हें एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य दिया जा सके। हालांकि, ब्यौहारी जैसे केंद्रों पर बिस्तरों की संख्या बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता महसूस की जा रही है।

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