प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी शिकायत में संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है, तो मजिस्ट्रेट के लिए एफआईआर दर्ज करने का आदेश देना अनिवार्य है. कोर्ट ने रामपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) का 25 मई 2026 का आदेश रद्द कर दिया. इस आदेश में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 173(4) के तहत एफआईआर दर्ज कराने की मांग खारिज कर दी गई थी. जस्टिस संजीव कुमार ने रामपुर निवासी राज कौर की याचिका स्वीकार करते हुए मामले को नए सिरे से निर्णय के लिए मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया.

इसे भी पढ़ें- CJP प्रदर्शन को लेकर नोएडा में आज भी हाई अलर्ट, 5 हजार से ज्यादा वाहनों की चेकिंग; दिल्ली बॉर्डर पर सख्ती

पति और बेटे पर तलवार से हमले का आरोप

राज कौर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया कि 4 अप्रैल 2026 को उनके पति और बेटे खेत में काम कर रहे थे. इसी दौरान आरोपियों और दो-तीन अज्ञात लोगों ने उन पर तलवार से हमला कर दिया, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए. याचिकाकर्ता का आरोप था कि राजनीतिक दबाव के कारण पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की. इसके बाद उन्होंने सीजेएम की अदालत में आवेदन दिया.

पुलिस रिपोर्ट के आधार पर खारिज हुई थी अर्जी

मजिस्ट्रेट ने पुलिस से रिपोर्ट मिलने के बाद आवेदन खारिज कर दिया था. आदेश में कहा गया कि राज कौर ने अपने पति और बेटे के खिलाफ मामला दर्ज होने का तथ्य छिपाया था. इस फैसले को उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी.

हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के निष्कर्ष पर उठाए सवाल

हाईकोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट का निष्कर्ष स्थापित कानूनी सिद्धांतों के अनुरूप नहीं था. आवेदन में संज्ञेय अपराध बनने की संभावना पर विचार नहीं किया गया. पुलिस रिपोर्ट से भी स्पष्ट था कि दोनों पक्षों के बीच मारपीट हुई थी और एक पक्ष की एफआईआर दर्ज थी. कोर्ट ने मामले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया.

इसे भी पढ़ें- अखिलेश की चुनौती पर योगी का पलटवार, बोले- अयोध्या से आप भी लड़िए, मैं भी लड़ता हूं; सपा प्रमुख ने दिया जवाब

छात्र की मौत के मामले में रमाकांत यादव को राहत

एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने छात्र आयुष कुमार सरोज की मौत से जुड़े मामले में रमाकांत यादव के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही निरस्त कर दी. 9 सितंबर 2023 को रामगढ़ के बंधवा बाजार स्थित कंचन बालिका इंटर कॉलेज के छात्र की मौत हुई थी. एफआईआर में विद्यालय प्रबंधन और प्रधानाचार्य की भूमिका पर संदेह जताया गया था. रमाकांत यादव ने समन आदेश को चुनौती दी थी. कोर्ट ने कहा कि उनके खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त विश्वसनीय सामग्री नहीं है.