अंबाला पुलिस ने सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने का झांसा देकर युवाओं से करोड़ों रुपये ठगने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से फर्जी दस्तावेज और मोहरें बरामद की हैं।
अनिल शर्मा, अंबाला। पुलिस अधीक्षक अंबाला के कुशल निर्देशानुसार काम करते हुए अंबाला पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने के नाम पर मासूम युवाओं से लाखों रुपए की ठगी करने वाले एक बेहद शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने तकनीकी संसाधनों और गुप्त सूचना तंत्र की मदद से गिरोह के तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। यह कार्रवाई अंबाला पुलिस द्वारा अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रही मुहिम के तहत की गई है।
तीन मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में
पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपियों की पहचान अजय कुमार (निवासी कुरुक्षेत्र), सुनील कुमार उर्फ साहिल (निवासी झज्जर) और वारिस आलम उर्फ समीर (निवासी पूर्णिया, बिहार हाल निवासी दिल्ली) के रूप में हुई है। आरोपी अजय कुमार को 12 मई 2026 को गिरफ्तार कर 10 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया था, जिसके खिलाफ पहले भी दिल्ली में मामला दर्ज है। इसके बाद सुनील कुमार को 15 मई और वारिस आलम को 17 मई को गिरफ्तार किया गया था। रिमांड अवधि समाप्त होने पर आज आरोपियों को माननीय न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
ऐसे हुआ इस महाठगी का खुलासा
इस पूरे फर्जीवाड़े की शिकायत श्री सोहन लाल (निवासी गांव बब्याल, थाना महेश नगर, अंबाला) व अन्य पीड़ितों द्वारा 21 अप्रैल 2025 को थाना महेश नगर में आरोपी योगेश शर्मा व अन्य के खिलाफ दर्ज कराई गई थी। आरोपियों ने सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने के नाम पर इन लोगों से करीब 60 लाख रुपए ठगे थे। पुलिस द्वारा मामले की गहनता से की गई जाँच में सामने आया है कि यह अंतरराज्यीय गिरोह अब तक देश के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 40 बेरोजगार युवाओं से करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी कर चुका है।
ठगी करने का अनोखा और शातिर तरीका
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी खुद की सरकारी विभागों में ऊंची पहुंच बताते थे। युवाओं को फंसाने के लिए वे उन्हें फर्जी जॉइनिंग लेटर (नियुक्ति पत्र) थमा देते थे। युवाओं को शक न हो, इसके लिए आरोपी उन्हें किसी भी स्थान पर 2 या 3 महीने के लिए काम पर लगा देते थे और उन महीनों की सैलरी (वेतन) खुद अपनी जेब से देते थे। इससे पीड़ित को लगता था कि उसकी नौकरी पक्की हो गई है और गिरोह की ठगी पकड़ी नहीं जाती थी। इस झांसे में आकर युवा अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई सौंप देते थे।
आरोपियों से भारी मात्रा में सामग्री बरामद
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और सामग्री बरामद की है। इसमें FCI, गृह मंत्रालय, टैक्सेशन विभाग, एक्साइज विभाग और रेलवे आदि प्रमुख विभागों की 17 जाली मोहरें (Stamps) शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस ने रेलवे विभाग और राज्यसभा से संबंधित 08 जाली नियुक्ति पत्र, 07 जाली प्लेटिनियम कार्ड, ₹2 लाख की नकदी, मोबाइल फोन और दूसरों के नाम पर जारी कराए गए फर्जी सिम कार्ड बरामद किए हैं। इस बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने में आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने मुस्तैदी दिखाई है।

