अनिल मालवीय, इछावर। सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजनाएं और मरीजों की जान बचाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर दौड़ाई जा रही सरकारी एम्बुलेंस अब मरीजों के लिए नहीं, बल्कि ड्राइवरों की एक्स्ट्रा कमाई का जरिया बन चुकी हैं। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र से एक ऐसा ही शर्मनाक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे जिले के स्वास्थ्य महकमे की पोल खोलकर रख दी है। जिस एम्बुलेंस को मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उसकी जिंदगी बचानी चाहिए, उस गाड़ी में अब मरीजों की जगह सवारियां और स्कूली बच्चे सफर कर रहे हैं!
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, खुली पोल
इछावर में एम्बुलेंस ड्राइवरों की इस मनमानी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे एम्बुलेंस का उपयोग मरीजों को लाने के बजाय स्कूली बच्चों और आम सवारियों को ढोने के लिए किया जा रहा है। इतना ही नहीं, ये ड्राइवर सरकारी डीजल फूंककर अपनी गाड़ियों को अनावश्यक इधर-उधर घुमाते हैं, ताकि मीटर की रीडिंग बढ़ाई जा सके और जमकर फर्जीवाड़ा किया जा सके।
मरीज करते रहते हैं इंतजार, ढाबों पर सजती है महफिल
क्षेत्र की जनता का आरोप है कि जब भी कोई गंभीर मरीज एम्बुलेंस के लिए फोन करता है, तो उन्हें 3 से 4 घंटे तक गाड़ी उपलब्ध नहीं होने का बहाना बना दिया जाता है। मरीज अस्पताल जाने के लिए तड़पता रहता है, लेकिन ये एम्बुलेंस किसी मरीज के घर के बाहर नहीं, बल्कि क्षेत्र के ढाबों, होटलों या निजी आयोजनों के बाहर कतार में खड़ी दिखाई देती हैं। एक-एक आयोजन स्थल पर तीन-तीन, चार-चार एम्बुलेंस का खड़ा होना इस बात का सबूत है कि इन्हें न तो किसी नियम का खौफ है और न ही किसी की जान की परवाह। बड़ा सवाल है कि क्या सीहोर का स्वास्थ्य विभाग और जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे गोरखधंधे से अनजान हैं? या फिर आंखें मूंदकर इस लापरवाही को शह दी जा रही है? मरीजों के हक की एम्बुलेंस से निजी काम करने वाले इन ड्राइवरों पर कब तक कार्रवाई होगी, यह देखने वाली बात होगी।
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