नई दिल्ली/चंडीगढ़। पश्चिम बंगाल के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मिशन पंजाब पर अपना ध्यान केंद्रित कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों को लेकर अपनी रणनीतियां तैयार कर ली हैं। इस बार पार्टी शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन किए बिना, राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।
शाह की अगुवाई में बनेगी रणनीति, शुरू होगी नशा विरोधी यात्रा
गृह मंत्री अमित शाह इसी महीने पंजाब बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक बड़ी बैठक करने जा रहे हैं, जिसमें चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस बैठक में राज्य के भीतर बीजेपी की आगामी नशा विरोधी यात्रा की रूपरेखा भी तय की जाएगी। इसके साथ ही पार्टी ने ग्रामीण इलाकों और किसानों के घरों तक सीधे पहुंचने के लिए एक विशेष अभियान की शुरुआत की है। संगठन को मजबूत करने के लिए बूथ स्तर पर प्रभारियों की नियुक्ति और उनके प्रशिक्षण का काम भी तेजी से चल रहा है।
रवनीत सिंह बिट्टू छोड़ सकते हैं मंत्री पद, पंजाब की राजनीति में होंगे सक्रिय
केंद्रीय रेलवे राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने उन्हें दोबारा राज्यसभा न भेजने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि बिट्टू 21 जून से पहले मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके बाद पार्टी उन्हें पंजाब की सक्रिय राजनीति में उतारेगी और उनके विधानसभा चुनाव लड़ने की पूरी संभावना है। हालांकि, बीजेपी चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा नहीं करेगी।
नाराज नेताओं को मनाने में जुटी बीजेपी
पंजाब में चुनावी जमीन मजबूत करने के साथ-साथ बीजेपी अपने नाराज नेताओं को मनाने में भी जुटी हुई है। केवल सिंह ढिल्लों को अध्यक्ष बनाए जाने से नाराज चल रहे पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने हाल ही में दिल्ली जाकर अमित शाह से मुलाकात की थी, जिसके बाद उन्होंने अपनी नाराजगी की खबरों को खारिज कर दिया है।

वहीं, पार्टी से नाराज होकर इस्तीफा दे चुके महासचिव डॉ. जगमोहन राजू को मनाने के लिए भी आलाकमान लगातार बातचीत कर रहा है। गौरतलब है कि पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को पंजाब में एक भी सीट नहीं मिली थी, लेकिन पार्टी को 18.56 फीसदी वोट हासिल हुए थे।
ग्रामीण क्षेत्रों में पैर पसारने पर जोर, चौकोनी मुकाबले पर टिकी उम्मीदें
शहरी क्षेत्रों में अपनी मजबूत पकड़ मानने वाली बीजेपी ने अब अपने कार्यकर्ताओं को ग्रामीण क्षेत्रों और गांवों में पैठ बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। बीजेपी की नजरें राज्य में होने वाले चौकोनी (चार-तरफा) मुकाबले पर टिकी हैं। पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि बहुकोणीय मुकाबले में जीत का अंतर बेहद कम होता है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में अपना जनाधार बढ़ाकर बीजेपी पंजाब में बड़ी सफलता हासिल कर सकती है।
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