Dharm Desk – भारतीय ज्योतिष में मंगल ग्रह को ऊर्जा साहस, पराक्रम, जमीन और शक्ति का कारक माना गया है। कुंडली में मंगल ग्रह मजबूत स्थिति में होता है। तो इंसान को हर क्षेत्र में सफलता निडरता और नेतृत्व क्षमता हासिल होती है। लेकिन जब मंगल कमजोर पड़ जाता है या किसी कारण से अशुभ प्रभाव देने लगता है। तो इंसान का पूरा जीवन उतार-चढ़ाव मानसिक तनाव और शारीरिक परेशानियों से भर जाता है।

यदि जीवन में भी बिना किसी कारण के परेशानियां आ रही हैं।तो इस बात का संकेत हो सकता है कि मंगल ग्रह नाराज चल रहा है या सही फल नहीं दे रहा है।जब मंगल का दुष्परिणाम शुरू होता है। तो इंसान के जीवन में कई तरह की समस्याएं एक साथ आने लगती हैं। इन लक्षणों से आप आसानी से पहचान सकते हैं कि मंगल अशुभ स्थिति में है।

खराब मंगल के संकेत और जीवन पर प्रभाव

  1. शारीरिक असुविधाएं – शरीर में अकारण बीमारियां घेरने लगती हैं। रक्त संबंधी परेशानियां होती हैं और इंसान हमेशा थकान व ऊर्जा की कमी महसूस करता है।
  2. परिवार में मतभेद – भाइयों और सगे-संबंधियों के साथ अनबन बनी रहती है। छोटी-छोटी बातों पर मतभेद और आपसी झगड़े इतने बढ़ जाते हैं कि घर का वातावरण तनावपूर्ण हो जाता है।
  3. सामाजिक संबंधों में दूरी – संकट या जरूरत के समय अपनों और आसपास के लोगों का साथ मिलना बंद हो जाता है।इंसान अलग-थलग पड़ जाता है और अकेलापन महसूस करने लगता है।
  4. मन में अशांति और क्रोध – मंगल के खराब होने से स्वभाव में उग्रता आ जाती है। बात-बात पर बहुत ज्यादा गुस्सा आना और चिड़चिड़ापन हावी होना आम बात हो जाती है।

पारंपरिक एवं आसान उपाय

कुंडली में मंगल के दुष्परिणाम या जीवन में आ रही इन तमाम समस्याओं से जूझ रहे हैं तो इसके लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। वैदिक परंपरा में इसके लिए बहुत सरल प्राकृतिक और अचूक जल-प्रवाह उपाय बताए गए हैं। बहते हुए पानी के साथ किए जाने वाले ये उपाय मंगल की नकारात्मक ऊर्जा को शांत करके जीवन में सुख-शांति और सकारात्मकता लाते हैं।

  1. तांबे के टुकड़े का जल में अर्पण – तांबे की धातु का सीधा संबंध मंगल ग्रह से माना गया है। यदि मंगल खराब फल दे रहा है।तो तांबे का एक छोटा सा वर्गाकार चौरस टुकड़ा लें। इस टुकड़े को बहते हुए साफ जल या नदी में श्रद्धापूर्वक प्रवाहित कर दें। ऐसा करने से मंगल का अशुभ प्रभाव तेजी से कम होने लगता है।
  2. गुड़ का जल प्रवाह – मंगल देव को खुश करने और उनकी शांति के लिए गुड़ का दान तथा जल प्रवाह बहुत लाभकारी माना जाता है। थोड़ा सा शुद्ध गुड़ लें और उसे बहते हुए पानी में बहा दें। इस उपाय से मंगल के कारण आ रही रुकावटें और बीमारियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।

उत्साह पूर्णविचार

जल प्रवाह का उपाय करते समय मन में पूर्ण श्रद्धा और सकारात्मक भाव रखें। इन उपायों को मंगलवार के दिन करना सबसे अधिक फलदायी और प्रभावकारी माना जाता है। ध्यान रखें कि तांबे का टुकड़ा पूरी तरह से चौरस ही होना चाहिए।