Anant Singh News: मोकामा के विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर बिहार विधानसभा ने उन्हें नोटिस जारी किया है। विधानसभा सचिव संजय कुमार की ओर से भेजे गए इस नोटिस में अनंत सिंह से सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा गया है। बता दें कि आज सोमवार को अनंत सिंह ने नोटिस प्राप्त किया है।
जानें क्या है पूरा मामला?
दरअसल, यह पूरा मामला बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट पर हुए चुनाव से जुड़ा है। चुनाव के दौरान अनंत सिंह पर अपनी ही पार्टी जेडीयू के उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने का आरोप लगा था। उन्होंने जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार के बजाय जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज कुमार के समर्थन में प्रचार किया था। इसे पार्टी विरोधी गतिविधि मानते हुए जेडीयू ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
उमेश कुशवाहा ने स्पीकर से की थी शिकायत
इस मामले में जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को आवेदन देकर अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने की कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया था। शिकायत के समर्थन में पार्टी की ओर से अखबारों की कटिंग, सीडी और अन्य साक्ष्य भी सौंपे गए थे। अब इसी शिकायत के आधार पर विधानसभा सचिवालय ने अनंत सिंह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। उन्हें सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद उनके जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया बढ़ सकती है।
पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ किया था प्रचार
गौरतलब है कि बिहार में चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों समेत विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनाव हुए थे। पटना स्नातक सीट से जेडीयू ने नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन अनंत सिंह ने उनके समर्थन में प्रचार करने के बजाय जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज कुमार के पक्ष में मोर्चा संभाला था।
27 अक्टूबर को चुनाव परिणाम घोषित हुए, जिसमें जेडीयू के नीरज कुमार ने जीत दर्ज की, जबकि जन सुराज के डॉ. अनुज कुमार को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव नतीजे आने के बाद जेडीयू ने अनंत सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर भी कार्रवाई की मांग उठी। अब विधानसभा सचिवालय की ओर से नोटिस जारी होने के बाद इस मामले में अगला कदम अनंत सिंह के जवाब पर निर्भर करेगा।
दुलारचंद यादव हत्याकांड में भी बढ़ी मुश्किलें
अनंत सिंह के लिए मुश्किलें सिर्फ विधानसभा में चल रही कार्रवाई तक सीमित नहीं हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में भी उनकी कानूनी परेशानी बढ़ी हुई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
ये भी पढ़ें- ‘घट सकती है, कोई अप्रिय घटना’, तेज प्रताप यादव ने सरकार से की सुरक्षा बढ़ाने की मांग

