Asaduddin Owaisi Attack On Elon Musk: दुनिया के सबसे अमीर इंसान और टेस्ला व स्टारलिंक (Starlink) के मालिक एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस स्टारलिंक भारत में लाइसेंस देने को लेकर जारी बवाल में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री हुई है। भारत के प्रधानमंत्री पर टिप्पणी करने को लेकर ओवैसी ने एलन मस्क को लताड़ लागई है।एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मोदी विरोधी हूं लेकिन हमारे पीएम पर किसी विदेशी को टिप्पणी करने का हक नहीं है। कोई गोरा भारत को आदेश नहीं देगा कि उसे कब और क्या करना है।

बता दें कि यह पूरा विवाद स्टारलिंक को मंजूरी में देरी से शुरू हुआ है।  अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की एंट्री में देरी को लेकर मुकेश अंबानी के बहाने मोदी सरकार पर सवाल उठाए थे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने यहां तक पूछ लिया था कि क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं? मस्क का आरोप था कि जियो जैसी कंपनियों के दबदबे के कारण भारत में उनकी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को मंजूरी नहीं दी जा रही है।

अब मामले में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री हुई है। ओवैसी ने एलन मस्क के बयानों पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध अपनी जगह है, पर कोई विदेशी कारोबारी भारत को आदेश नहीं दे सकता। एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ एआईएमआईएम के सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद हैदराबाद में ओवैसी ने कहा कि वे हमेशा प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ थे और रहेंगे। लेकिन मस्क प्रधानमंत्री के बारे में ऐसा कैसे बोल सकते हैं। उन्होंने पूछा कि बीजेपी और मोदी सरकार गोरी चमड़ी से इतना क्यों डरती है। उन्होंने कहा कि देश के संसाधन कैसे इस्तेमाल होंगे, यह देश तय करेगा। अमेरिका पर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए बोले कि वह भारत से रूसी तेल कम खरीदने को कहता है, जबकि खुद रूसी ऊर्जा उत्पाद खरीदता है। उन्होंने मोदी से कहा कि मस्क को साफ बता दें कि भारत अपने फैसले खुद लेगा, और किसी गोरे का पेट भरने के लिए नागरिकों का पेट नहीं काटा जाएगा

एक दिन पहले सुनील भारती मित्तल ने भी मस्क को दिया था जवाब

इस मामले में एक दिन पहले सुनील भारती मित्तल ने भी मस्क को जवाब दिया था।  भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने एक कार्यक्रम में कहा था कि उनकी कंपनी एयरटेल ने 5 साल पहले सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए आवेदन किया था और उसका जमीनी नेटवर्क तीन साल से तैयार है। उनके इस जवाब से स्पष्ट हो गया है कि भारत में सैटेलाइट बेस्ड इंटरनेट सर्विस शुरू करने के लिए मंजूरी के इंतजार में सिर्फ मस्क की स्टारलिंक ही नहीं, भारतीय कंपनियां भी खड़ी हैं। सुनील भारती मित्तल के इस जवाब के साथ ही मस्क के आरोपों और दावों की धज्जियां उड़ गई है।

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की जंग क्यों अहम?

सैटेलाइट इंटरनेट उन इलाकों में कनेक्टिविटी पहुंचाने का जरिया बन सकता है, जहां मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क बिछाना मुश्किल है। पहाड़ी क्षेत्रों, दूरदराज के गांवों और देश के ऐसे हिस्सों में, जहां इंटरनेट की पहुंच सीमित है, यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। इस मार्केट में स्टारलिंक के अलावा भारती एयरटेल ग्रुप की कंपनी यूटेलसैट वनवेब और रिलायंस की जियो सैटकॉम भी मौजूद हैं। ऐसे में मंजूरी से जुड़े नियम सिर्फ मस्क की कंपनी स्टारलिंक तक ही नहीं, बल्कि भारतीय कंपनियों के लिए भी उसी निष्पक्षता से काम कर रहे हैं।

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