प्रवीण भारद्धाज, पानीपत। स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा वर्करों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद आशा वर्करों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के माध्यम से केंद्रीय मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए जल्द मांगें पूरी करने की अपील की।
उनके हितों की हो रही अनदेखी
प्रदर्शन कर रही आशा वर्करों का कहना है कि वे गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। गर्भवती महिलाओं की देखभाल, टीकाकरण अभियान, नवजात शिशुओं की निगरानी से लेकर विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है। इसके बावजूद उनके अपने हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
मानदेय में 1500 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की मांग
आशा वर्करों ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री द्वारा उनके मानदेय में 1500 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक इसका लाभ उन्हें नहीं मिला। उनका कहना है कि घोषणा के बावजूद बढ़ा हुआ मानदेय लागू नहीं किया गया, जिससे उनमें भारी नाराजगी है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने यह भी कहा कि उन्हें समय पर मानदेय नहीं मिलता, जबकि वे दिन-रात स्वास्थ्य सेवाओं में जुटी रहती हैं। उनका कहना है कि कोरोना काल से लेकर आज तक उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुन रही।
बढ़े हुए मानदेय को तत्काल प्रभाव से हो लागू
आशा वर्करों ने मांग की कि बढ़े हुए मानदेय को तत्काल लागू किया जाए, समय पर वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए और उनकी अन्य लंबित मांगों का भी शीघ्र समाधान किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में आंदोलन उग्र रूप लेगा।
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