अभय मिश्रा, मऊगंज। दावों की चकाचौंध के बीच मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले से सामने आई एक तस्वीर व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है। जिस जिले में ग्रामीण विकास के नाम पर 650 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हों, वहां की जमीनी हकीकत यह है कि एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचने के लिए 1.2 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
मामला देवतालाब विधानसभा के पिडारिया पंचायत का है। सरबरा गांव में सड़क न होने के कारण एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी और लाचार परिजनों को प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को पैदल ही मुख्य मार्ग तक लाना पड़ा। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें साफ दिख रहा है कि गर्भवती महिला किसी व्यवस्था की मेहरबानी की मोहताज नहीं, बल्कि सिस्टम के भ्रष्टाचार की शिकार है।
मऊगंज के देवतालाब क्षेत्र स्थित सरबरा गांव में सड़क का वजूद ही नहीं है। नतीजा यह रहा कि जब इस महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हुई और एंबुलेंस को फोन किया गया, तो एंबुलेंस गांव के बाहर ही ठिठक गई। इसके बाद मजबूरी में प्रसव पीड़िता को बदहाल रास्ते पर करीब 1.2 किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ा।
स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश अब चरम पर है। मरीजों को खाट पर लादकर ले जाना हो, बुजुर्गों की लाचारी हो या स्कूल जाने वाले बच्चों का संघर्ष- हर मौसम में यह गांव प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेलता है। बारिश आते ही यह इलाका पूरी तरह कट जाता है। नेता आते हैं, वोट मांगते हैं और चले जाते हैं। लेकिन सवाल यह है कि जिस जिले में ग्रामीण विकास के 650 करोड़ रुपये के काम संदेह के घेरे में हो और शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों के दरवाजे तक पहुंच चुकी हो, वहां 1 किलोमीटर पक्की सड़क का न होना यह साबित करने के लिए काफी है कि विकास हुआ नहीं, बल्कि विकास का ‘बंदरबांट’ हुआ है।
खैर मऊगंज प्रशासन को क्या पता चले कि सड़कें सिर्फ कंक्रीट का ढांचा नहीं होतीं, किसी के जीवन और सांसों की डोर होती हैं। मऊगंज का यह वायरल वीडियो चीख-चीखकर पूछ रहा है कि आखिर 650 करोड़ किसकी जेब में गया? जब मेडिकल स्टोर से सीमेंट ,सरिया खरीदी जा रही थी तब उसका मूल्यांकन क्यों नहीं किया गया,और कब तक सरबरा गांव के लोग बुनियादी हक के लिए यूं ही सड़कों पर घिसटने को मजबूर रहेंगे?
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