Lifestyle Desk – गर्मी का मौसम अपने साथ तेज धूप, लू और बढ़ती उमस लेकर आता है. जहां आम लोगों के लिए यह मौसम असहजता पैदा करता है, वहीं अस्थमा के मरीजों के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है. इस मौसम में गर्मी और नमी में होने वाले बदलाव श्वसन तंत्र को प्रभावित करते हैं, जिससे अस्थमा के लक्षण अचानक बढ़ सकते हैं. यही वजह है कि इस मौसम में अस्थमा के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.

गर्मी में क्यों बढ़ती है परेशानी?

अस्थमा एक ऐसी स्थिति है जिसमें श्वास नलिकाएं संवेदनशील हो जाती हैं और सूजन के कारण संकरी होने लगती हैं. गर्मियों में तापमान बढ़ने के साथ वातावरण में कई ऐसे कारक सक्रिय हो जाते हैं जो अस्थमा के अटैक को ट्रिगर कर सकते हैं. तेज गर्म हवाएं या लू श्वसन मार्ग को प्रभावित करती हैं. जब कोई व्यक्ति अत्यधिक गर्म और शुष्क हवा में सांस लेता है, तो वायुमार्ग में जलन पैदा हो सकती है. इससे खांसी, सीने में जकड़न और सांस फूलने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं.

उमस भी बनती है बड़ी वजह

गर्मी के साथ बढ़ने वाली नमी या उमस भी अस्थमा मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है. अधिक नमी वाले वातावरण में हवा भारी महसूस होती है, जिससे फेफड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन लेने में अधिक मेहनत करनी पड़ती है. इसके अलावा, उमस के कारण फफूंद, धूल कण और अन्य एलर्जी पैदा करने वाले तत्व तेजी से बढ़ते हैं, जो अस्थमा के लक्षणों को गंभीर बना सकते हैं.

वायु प्रदूषण का बढ़ता असर

गर्मियों में कई शहरों में ओजोन और अन्य प्रदूषक तत्वों का स्तर बढ़ जाता है. तेज धूप और उच्च तापमान के कारण वातावरण में रासायनिक प्रतिक्रियाएं बढ़ती हैं, जिससे वायु गुणवत्ता खराब हो सकती है. प्रदूषित हवा अस्थमा रोगियों के फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालती है और सांस लेने में कठिनाई बढ़ा सकती है.

डिहाइड्रेशन भी बढ़ा सकता है जोखिम

गर्मी में शरीर से पसीने के रूप में अधिक पानी निकलता है. यदि पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पिया जाए तो शरीर डिहाइड्रेट हो सकता है. डिहाइड्रेशन के कारण श्वसन तंत्र की नलिकाएं अधिक संवेदनशील हो सकती हैं, जिससे अस्थमा के लक्षण उभरने की संभावना बढ़ जाती है.

कैसे करें बचाव?

अस्थमा मरीजों को गर्मी के मौसम में कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए. दिन के सबसे गर्म समय, खासकर दोपहर में बाहर निकलने से बचें. घर से बाहर जाते समय मास्क का उपयोग करें ताकि धूल और प्रदूषक तत्वों से बचाव हो सके. पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और शरीर को हाइड्रेट रखें. घर के अंदर साफ-सफाई बनाए रखें और फफूंद या धूल जमा न होने दें.
इसके अलावा, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं नियमित रूप से लें और अपना रेस्क्यू इनहेलर हमेशा साथ रखें. यदि सांस लेने में अचानक ज्यादा परेशानी, सीने में तेज जकड़न या लगातार खांसी की समस्या हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें.