Dharm Desk – देशभर में इन दिनों गणेश उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। हर तरफ गणपति के जयकारे गूंज रहे हैं। ऐसे पुण्यदाई माहौल में अगर मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर का रुख करें तो वहां आस्था और चमत्कार की एक ऐसी गाथा मिलती है जो किसी को भी हैरान कर सकती है। उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर कोई साधारण मंदिर नहीं है। इस मंदिर का मौजूदा स्वरूप लगभग 250 साल पुराना माना जाता है।

गणेश उत्सव के इस पावन मौके पर यह मंदिर आस्था परंपरा और आज के दौर में बच्चों को सही दिशा दिखाने का एक बहुत महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर में आने वाले बच्चों को बप्पा के सामने मोबाइल का बेवजह उपयोग न करने और गेमिंग कम करने का संकल्प दिलाया जाता है। अब तक हजारों बच्चे यह संकल्प ले चुके हैं।इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां एक ही पत्थर में भगवान गणेश के तीन अलग-अलग रूप समाए हुए हैं। इस मंदिर का जीर्णोद्धार अहिल्याबाई होलकर के शासनकाल में हुआ था। मंदिर के गर्भगृह की खूबसूरती देखने लायक है। जहां की दीवारों पर करीब 35 किलोग्राम शुद्ध चांदी का बारीक काम किया गया है। मंदिर में गणपति के तीन रूप राय दीवाने जिसमें 1.चिंतामन, 2.इच्छामन और 3.सिद्धि विनायक शामिल है। चिंतामन भक्तों के सभी दुखों को हरते हैं, इच्छामन हर मनोकामना पूरी करते हैं और सिद्धि विनायक जीवन में रिद्धि-सिद्धि बरसाते हैं।

तीन अनोखी परंपराएं

1.उल्टा स्वस्तिक

इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के बीच ‘उल्टा स्वास्तिक’ बनाने की एक बहुत अनोखी परंपरा काफी मशहूर है। संतान प्राप्ति या किसी खास काम की मन्नत लेकर आने वाले भक्त मंदिर के पीछे यानी भगवान की पीठ की तरफ उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं। जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है।तो वे बप्पा का शुक्रिया अदा करने दोबारा यहां आते हैं और ठीक उसी जगह पर सीधा स्वास्तिक बनाकर अपना आभार प्रकट करते हैं।

2.मन्नत का धागा

इसके अलावा कई श्रद्धालु यहां धागा रक्षासूत्र बांधते हैं और मन्नत पूरी होने के बाद उसे खोलने वापस लौटते हैं।

3.तुलादन

एक और खास तरीका यहां तुलादान है। लोग अपनी या अपने बच्चों की मन्नत पूरी होने पर उनके वजन के बराबर अनाज, फल, कपड़े या मिठाइयां दान करते हैं। खासतौर पर संतान प्राप्ति के बाद बच्चे के वजन के बराबर लड्डू तोलकर श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में बांटने का रिवाज यहां बहुत पुराना है।मालवा अंचल में शादी-विवाह का पहला निमंत्रण पत्र लग्न पत्रिका भी सबसे पहले चिंतामन गणेश के चरणों में ही चढ़ाई जाती है और शादी के बाद नया जोड़ा बप्पा का आशीर्वाद लेने यहां जरूर आता है।