मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. रामनगरी अयोध्या में भगवान श्रीराम की लीला का मंचन 22 वर्षों से बिना रुके, 365 दिन अनवरत हो रहा है. परंपरागत रामलीला समितियों पर आर्थिक संकट के चलते जब इनका आकर्षण घटने लगा, तब प्रदेश सरकार ने उच्चस्तरीय रामलीला के मंचन के लिए 22 साल पहले अनवरत रामलीला की शुरुआत की थी. तब से तुलसी स्मारक सदन में नित्य रामलीला का मंचन हो रहा है.

अखिलेश यादव के शासनकाल में सरकारी फंड के अभाव में 24 नवंबर 2015 से 2 मई 2017 तक इसका मंचन रोक दिया गया था. कथा वाचकों के पारिश्रमिक को लेकर आंदोलन के बाद फंड रिलीज नहीं हुआ, जिससे रामलीला और व्यास कथा दोनों बंद हो गईं. धार्मिक कार्यक्रम बंद करने के आरोपों के बाद 22 दिनों तक कार्यक्रम चलाकर फिर बंद कर दिया गया था. अब योगी सरकार में अनवरत रामलीला को नई ऊंचाई मिली है. मंचन के स्तर को सुधारने के लिए संस्कृति विभाग ने फंड को 40 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दिया है. वर्तमान में इसका मंचन तुलसी स्मारक सदन के नवनिर्मित भवन में किया जा रहा है.

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अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के CBO आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि अनवरत रामलीला को और बेहतर बनाने की कोशिश हो रही है. कलाकारों व मंडलियों का मानदेय भी बढ़ाया गया है. अब 2 वर्ग की मंडलियों के लिए अलग-अलग पारिश्रमिक तय है. सामान्य मंडलियों के कलाकारों को प्रति कलाकार 700 रुपये और राष्ट्रीय स्तर की मंडलियों को 1000 रुपये की दर से भुगतान किया जा रहा है.

मंडलियों के चयन के लिए डीएम की अध्यक्षता में चयन समिति गठित है, जो सालभर के लिए 26 मंडलियों का चयन करती है. एक मंडली को 15 दिनों तक लगातार मंचन का अवसर मिलता है. 24 मंडलियां सालभर मंचन करती हैं, जबकि 2 अतिरिक्त मंडलियां रिजर्व में रहती हैं ताकि मंचन बाधित न हो. वहीं, 7 साल पहले दिल्ली के रामलीला आयोजक सुभाष मलिक बाबी द्वारा गठित कमेटी से शुरू हुई फिल्मी सितारों वाली रामलीला भी आकर्षण का केंद्र है, जिसमें बॉलीवुड के नामी कलाकार हिस्सा लेते हैं. इस साल यह आयोजन जनवरी में अयोध्या में होगा. दीपोत्सव के दौरान संस्कृति-पर्यटन विभाग के आयोजनों में आधा दर्जन से अधिक देशों की रामलीलाओं का मंचन भी विशेष आकर्षण बनता है.