मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. रामनगरी अयोध्या मे जब रामलला टेंट में थे, तब भी और जब भव्य मंदिर में विराजमान हुए, तब भी. अयोध्या के प्रमोदवन बड़ी कुटीया स्थित बाबू लाल टेलर्स का परिवार बिना किसी प्रचार के पिछले 40 साल से श्रीराम की पोशाक सेवा कर रहा है. यहां के शंकर लाल बताते हैं कि उनकी दुकान सिर्फ एक टेलर की दुकान नहीं, बल्कि ठाकुर जी की सेवा का केंद्र है. यहां भगवान के लिए रेशमी और मखमली पोशाकें और संतों के लिए चौबंदी तैयार होती है.
शंकर लाल ने बताया कि इस सेवा की शुरुआत 1985 से हुई.उस समय श्री लाल दास जी मुख्य पुजारी थे. उन्हीं के माध्यम से मेरे पिताजी श्री बाबू लाल जी, बड़े भाई भगत साहब पहाड़ी और मैं, एक बड़ी और एक छोटी सिलाई मशीन लेकर गुंबद के नीचे ही बैठकर सिलाई करते थे. ढांचा गिरने तक हम वहीं बैठकर सिले. उसके बाद हम अपने यहां से पोशाक सिलकर पुजारी जी को देते रहे, यह सेवा कभी रुकी नहीं.”
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जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन के लिए आए थे, तब रामलला ने जो पोशाक धारण की थी, वह भी यहीं से गई थी…दो पोशाक गई थीं. एक हरे रंग की और एक भगवा. हरे वाली पोशाक में हीरा, पन्ना, पुखराज जड़कर बेहद भव्य बनाया गया था. ठाकुर जी ने पहले हरा और फिर भगवा वस्त्र धारण किया था.” 2017 में योगी सरकार के आने के बाद शुरू हुए दीपोत्सव से अब तक हर बड़े उत्सव की पोशाक यहीं बनती है. शंकर लाल के मुताबिक ठाकुर जी गर्मियों में रेशम और सर्दियों में मखमल के वस्त्र पहनते हैं.इस बार दीपोत्सव के लिए भी तीन पोशाकें भेजी जा चुकी हैं. “7 तारीख को दीपोत्सव है. हमारे ठाकुर जी उस दिन पीला वस्त्र धारण करेंगे. पीला वस्त्र पहुंच चुका है.”
पैसे के लिए नहीं, सेवा के लिए
इसके अलावा चारों भाइयों – राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न के साथ ही मुकदमा जीतने वाले छोटे सरकार और मंदिर में स्थापित बड़ी मूर्ति, दोनों के वस्त्र यही परिवार बनाता आ रहा है. जब उनसे पूछा गया कि इस सेवा से क्या मिलता है, तो उनका जवाब था -हम सेवा करते हैं, व्यापार नहीं. जो मिल गया, उसी में संतुष्ट हैं. सबसे बड़ा भाग्य तो यह है कि हम अयोध्या में पैदा हुए और हमें सरकार की सेवा मिली. यह पैसे के हिसाब से नहीं चलता.”

