मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. राम मंदिर चढ़ावा और दान पेटियों से धन चोरी के बहुचर्चित प्रकरण में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव, कृष्ण मोहन और अन्य अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज किए जाने की मांग को लेकर चल रही कानूनी प्रक्रिया में एक बार फिर सुनवाई टल गई है. सोमवार को निर्धारित तिथि पर भी रामजन्मभूमि थाना पुलिस की ओर से अदालत में अपनी आख्या या रिपोर्ट दाखिल नहीं की जा सकी, जिसके कारण मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) पीयूष त्रिपाठी की अदालत इस मामले में आगे कोई विचार या निर्णय नहीं ले सकी.
यह पूरा मामला तब तूल पकड़ा जब अयोध्या बार एसोसिएशन के महामंत्री शैलेंद्र कुमार जायसवाल ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक विस्तृत अर्जी दाखिल की. इस अर्जी में मंदिर के चढ़ावे और दान राशि के प्रबंधन में कथित गड़बड़ियों और चोरी के मामले में ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों की सीधी संलिप्तता का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है. अधिवक्ताओं का यह भी कहना है कि इस संवेदनशील मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों या चुनिंदा लोगों पर कार्रवाई करने के बजाय उन जिम्मेदार पदाधिकारियों पर भी शिकंजा कसा जाना चाहिए जिनके संरक्षण या प्रशासनिक चूक के चलते यह स्थिति उत्पन्न हुई.
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अदालत ने पिछली तारीखों पर इस अर्जी को संज्ञान में लेते हुए स्थानीय पुलिस से पूरी रिपोर्ट या आख्या तलब की थी. हालांकि, पुलिस द्वारा तय समयसीमा के भीतर रिपोर्ट पेश न किए जाने के कारण कार्यवाही बार-बार आगे बढ़ रही है. अब मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने इस प्रकरण की अगली सुनवाई के लिए 16 अक्टूबर की तारीख मुकर्रर की है. अब यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि 16 अक्टूबर को पुलिस की ओर से अदालत में क्या आख्या पेश की जाती है और इसके आधार पर अदालत क्या नया निर्देश जारी करती है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले में एफआईआर दर्ज होने या न होने का रास्ता साफ हो सकेगा.

