मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने का दावा कर रही है, लेकिन अयोध्या के मिल्कीपुर में सरकारी दावों की पोल खुलती नजर आ रही है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) मिल्कीपुर परिसर में 20 लाख रुपये की लागत से बना नया भवन लोकार्पण के ढाई महीने बाद भी ताले में बंद है. ग्रामीणों को बेहतर सुविधा देने के लिए इस भवन में पर्ची काउंटर, दवा वितरण कक्ष और कैंटीन की सुविधा शुरू होनी थी, लेकिन मरीजों को इन सुविधाओं की जगह सिर्फ दरवाजों पर लटके ताले दिख रहे हैं.

मिल्कीपुर के विधायक चंद्रभानु पासवान ने 9 जुलाई को फीता काटकर इस नवनिर्मित भवन का लोकार्पण किया था. लोकार्पण के दौरान उन्होंने परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया था. उस समय उम्मीद जताई गई थी कि अब मरीजों को पर्ची के लिए लंबी लाइन और दवा के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. लेकिन लोकार्पण के बाद से आज तक भवन का ताला नहीं खुला. रोजाना सीएचसी पहुंच रहे सैकड़ों मरीज और उनके परिजन नए भवन को बंद देखकर तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं.

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जानकारी के मुताबिक क्रिटिकल ग्रांट्स योजना के तहत इस भवन का निर्माण प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), अयोध्या द्वारा कराया गया था. इसका निर्माण कार्य फरवरी में शुरू हुआ और जून में पूरा कर लिया गया. इस पूरी परियोजना पर लगभग 20 लाख रुपये की लागत आई है.

हैंडओवर के नाम पर टालमटोल

जब इस बारे में जिम्मेदारों से बात की गई तो लापरवाही सामने आई. सीएचसी पर तैनात अधीक्षक आनंद सिन्हा ने बताया कि लोकार्पण तो हो गया, लेकिन ठेकेदार द्वारा अभी तक नए भवन का हैंडओवर विभाग को नहीं दिया गया है. इसी वजह से पर्ची काउंटर और दवा वितरण कक्ष शुरू नहीं हो पा रहे हैं. सवाल यह उठता है कि जब भवन का हैंडओवर ही नहीं हुआ था, तो विधायक से लोकार्पण क्यों कराया गया? क्या यह सिर्फ फीता काटने की औपचारिकता थी. फिलहाल 20 लाख की सरकारी इमारत ताले में कैद है और मरीज पुरानी अव्यवस्थाओं में ही इलाज कराने को मजबूर हैं. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जल्द भवन को शुरू कराने की मांग की है.