रामपुर. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की रामपुर जिला जेल से रिहाई की तैयारी तेज हो गई है. दोनों को 29 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिली थी. आज शनिवार को जमानत से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने की प्रक्रिया चल रही है. अगर सभी दस्तावेज समय पर पूरे हो गए तो दोनों आज जेल से बाहर आ सकते हैं.
आजम खान के अधिवक्ता नासिर सुल्तान और अन्य वकील जमानतियों के सत्यापन में जुटे हैं. शनिवार सुबह से ही वे संबंधित अधिकारियों के पास जाकर दस्तावेजों की पुष्टि करा रहे हैं. रिहाई के लिए 82 मुकदमों के परवाने जेल पहुंचने हैं. शुक्रवार शाम करीब 7:30 बजे तक इनमें से पांच परवाने जेल पहुंच चुके थे. बाकी परवाने शनिवार को पहुंचने की उम्मीद है.
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82 मुकदमों के परवाने का इंतजार
आजम खान और अब्दुल्ला आजम की रिहाई के लिए सभी जरूरी परवाने जेल प्रशासन तक पहुंचना जरूरी है. जमानतियों की तस्दीक के बाद कागजों पर हस्ताक्षर होंगे. फिर जरूरी दस्तावेज अदालत में जमा किए जाएंगे. इसके बाद परवाने जेल भेजे जाएंगे. पूरी प्रक्रिया समय से पूरी होने पर ही रिहाई संभव होगी.
29 अक्टूबर को हाईकोर्ट से मिली जमानत
दोनों को दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से 29 अक्टूबर को जमानत मिली थी. इसके बाद से परिवार और समर्थकों को उनकी रिहाई का इंतजार है. अधिवक्ता नासिर सुल्तान के मुताबिक, शनिवार को सभी औपचारिकताएं पूरी हो गईं तो दोनों जेल से बाहर आ सकते हैं.
17 नवंबर 2025 से जेल में बंद हैं पिता-पुत्र
आजम खान और अब्दुल्ला आजम 17 नवंबर 2025 से रामपुर जिला जेल में बंद हैं. एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोनों को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई थी. बाद में राज्य सरकार ने सजा बढ़ाने की मांग की. एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने आजम खान की सजा बढ़ाकर 10 साल कर दी, जबकि अब्दुल्ला की सजा सात साल ही रही.
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रिहाई के बाद समर्थकों की नजर
हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अब दोनों की जेल से बाहर आने की उम्मीद बढ़ गई है. हालांकि, केवल जमानत आदेश मिलने से तत्काल रिहाई नहीं होती. सभी मुकदमों में जरूरी परवाने और दस्तावेज पूरे होना जरूरी है. ऐसे में शनिवार को जेल प्रशासन और अदालत की प्रक्रिया पर सबकी नजर रहेगी.

