रामपुर. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. जौहर यूनिवर्सिटी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रिपोर्ट के आधार पर रामपुर में नई एफआईआर दर्ज की गई है. जांच में 416.14 करोड़ रुपये के निर्माण खर्च का हिसाब नहीं मिलने की बात सामने आई है. एफआईआर रामपुर के अजीम नगर थाने में दर्ज हुई है. इसमें आजम खां, मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, सीके एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड, ए ऐंड एस एंटरप्राइजेज और अन्य लोगों के नाम शामिल हैं. ये आरोप जांच एजेंसी की शिकायत पर आधारित हैं.

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416 करोड़ रुपये के निर्माण खर्च पर सवाल

यह मामला जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण और उसके लिए इस्तेमाल की गई जमीन से जुड़ा है. ईडी की जांच में 416.14 करोड़ रुपये के निर्माण खर्च का हिसाब नहीं मिलने का आरोप है. यह प्रकरण उन 27 मुकदमों से भी जुड़ा है, जिनमें 26 किसानों की जमीन और शत्रु संपत्ति पर कब्जा कर यूनिवर्सिटी के लिए इस्तेमाल करने के आरोप लगाए गए थे.

ट्रस्ट पर आजम खां के नियंत्रण का दावा

ईडी के मुताबिक, आजम खां जौहर यूनिवर्सिटी के संस्थापक और चांसलर थे. वह मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के चेयरमैन और आजीवन सदस्य भी थे. जांच एजेंसी का दावा है कि ट्रस्ट के अन्य सदस्यों को बैठकों की सूचना नहीं दी जाती थी और फैसलों में उनकी भूमिका सीमित थी. ईडी ने इसे ट्रस्ट पर आजम खां के नियंत्रण से जोड़कर देखा है.

सरकारी ठेकों की सामग्री यूनिवर्सिटी में लगाने का आरोप

एफआईआर के मुताबिक, कुछ ठेकेदारों ने सरकारी ठेके हासिल किए और उनसे जुड़ी निर्माण सामग्री यूनिवर्सिटी में लगाई. ईडी के अनुसार, सीके एसोसिएट्स को 2013-14 से 2016-17 के बीच करीब 186 करोड़ रुपये के सरकारी ठेके मिले. कंपनी के प्रबंध निदेशक के बयान के आधार पर एजेंसी ने आरोप लगाया कि ठेकों से जुड़ी 55.80 करोड़ रुपये की सामग्री यूनिवर्सिटी निर्माण में इस्तेमाल हुई.

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सरकारी धन और विकास निधि के इस्तेमाल की जांच

ईडी ने यूनिवर्सिटी परिसर में सरकारी मद से 23.41 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य और विधायक-एमएलसी क्षेत्र विकास निधि से 6.60 करोड़ रुपये खर्च होने का भी जिक्र किया है. एजेंसी के मुताबिक, इन मदों और ठेकेदारों के जरिए कुल 85.81 करोड़ रुपये के सार्वजनिक धन के इस्तेमाल का आरोप है. जांच में यह भी दावा किया गया कि सरकारी ठेके पाने वाली कुछ कंपनियों ने बाद में ट्रस्ट को दान दिया. अब एजेंसियां इन वित्तीय लेन-देन और निर्माण खर्च की जांच कर रही हैं.