हेमंत शर्मा, इंदौर। उज्जैन जिले के बड़नगर में मोहर्रम जुलूस के दौरान कथित ‘मॉक ब्लास्ट’ की घटना अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच गई है। इस मामले को लेकर इंदौर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही भविष्य में धार्मिक जुलूसों के दौरान इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रदेशभर में एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू करने की भी मांग उठाई गई है।यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता एवं हिन्दू जागरण मंच के जिला संयोजक सुमित हरड़िया ने दायर की है। उनकी ओर से अधिवक्ता जायेश गुरनानी ने हाईकोर्ट में पक्ष रखा।
याचिका में क्या कहा गया?
याचिका में कहा गया है कि 23 जून 2026 को बड़नगर में निकाले गए मोहर्रम जुलूस के दौरान कथित रूप से मॉक ब्लास्ट का प्रदर्शन किया गया। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि प्रथम दृष्टया यह मामला विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है, तो यह राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 के तहत अनुसूचित अपराध (Scheduled Offence) माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में मामले की जांच एनआईए से कराई जानी चाहिए। याचिका में यह भी मांग की गई है कि यदि एनआईए जांच संभव नहीं हो तो मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए, ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो सके।
धार्मिक जुलूसों के लिए एसओपी बनाने की मांग
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग की है कि प्रदेश में निकलने वाले सभी धार्मिक जुलूसों के लिए स्पष्ट और एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाई जाए। उनका तर्क है कि जुलूसों में सुरक्षा, विस्फोटक जैसी सामग्री, हथियारों के प्रदर्शन और संवेदनशील गतिविधियों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश होना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद और सुरक्षा संबंधी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
हाईकोर्ट में क्या हुआ?
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष हुई। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी ने न्यायालय से मामले में आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा।खंडपीठ ने राज्य शासन को जवाब और आवश्यक निर्देश प्रस्तुत करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।
जांच की दिशा पर टिकी निगाहें
यह मामला अब केवल बड़नगर की एक घटना तक सीमित नहीं रह गया है। हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका के बाद निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि राज्य सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या जांच किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जाती है या नहीं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि धार्मिक आयोजनों और जुलूसों के लिए सुरक्षा संबंधी नई गाइडलाइन बनाने को लेकर सरकार क्या निर्णय लेती है।
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