परवेज आलम, पूर्वी चंपारण। बगहा में एक तरफ नेपाल की आपदा के बाद गंडक (नारायणी) नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी है और बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, तो दूसरी तरफ इसी संकट की आड़ में सरेआम अवैध खनन का खेल चल रहा है। मानसून सत्र में सभी तरह के खनन पर पूर्ण प्रतिबंध होने के बावजूद, नारायणापुर और कैलाशनगर घाट से बड़े पैमाने पर बालू और सिल्ट का अवैध उत्खनन किया जा रहा है।
आपदा में अवसर और सरकारी धन की लूट
मंगलपुर और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में कटाव का भारी खतरा बना हुआ है, जिससे निपटने के लिए जल संसाधन विभाग युद्धस्तर पर एंटी-इरोजन वर्क्स करा रहा है। हैरानी की बात यह है कि नदी से ही मुफ्त में बालू और सिल्ट निकालकर जियो बैग्स भरे जा रहे हैं, और फिर इसी सामग्री का इस्तेमाल कटावरोधी कार्यों में धड़ल्ले से किया जा रहा है। आरोप है कि जिस बालू-सिल्ट के परिवहन और खरीद का फर्जी बिल बनाकर सरकारी खजाने से ठेकेदारों को भुगतान किया जाना है, उसे नदी से अवैध रूप से खोदकर निकाला जा रहा है। इस पूरी धांधली से सरकारी राजस्व को भारी क्षति पहुंच रही है और संवेदक व अभियंता मालामाल हो रहे हैं।
जनरेटर के सहारे रातों-दिन अवैध खुदाई
हालात यह हैं कि ठेकेदार कैमरे के सामने आने से कतरा रहे हैं, लेकिन जनरेटर लगवाकर रातों-दिन बालू और सिल्ट की खुदाई और ढुलवाई को अंजाम दे रहे हैं। मौके पर काम कर रहे मजदूरों ने स्वीकार किया कि उन्हें दिनेश नाम के व्यक्ति ने काम पर बुलाया है और वे केवल ठेकेदार के निर्देश पर जियो बैग भरकर गाड़ियों में लोड कर रहे हैं। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) से सटे इस संवेदनशील इलाके में गंडक के प्राकृतिक स्वरूप के साथ यह खिलवाड़ पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है।
अधिकारियों की दोहरी बातें और कार्रवाई का सवाल
इस गंभीर मामले पर जब जल संसाधन विभाग के अभियंता शम्भू सुमन से बात की गई, तो उनका कहना था कि खनन विभाग या प्रशासन की तरफ से ऐसा कोई निर्देश नहीं है कि नदी को नुकसान पहुंचाकर खनन किया जाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि संवेदक नदी से अवैध खनन कर रहे हैं, तो उन्हें सख्त निर्देश देकर तुरंत रोका जाएगा। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर खनन पर प्रतिबंध के बावजूद किसकी शह पर यह अवैध खेल चल रहा है और क्या जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कोई सख्त कार्रवाई करेंगे या फिर यह विनाशलीला यूं ही जारी रहेगी।


