संजय तिवारी, बलिया. जनपद में अरनब तूफान के असर से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. लगातार दो दिनों से हो रही बारिश और तेज हवाओं के कारण सैकड़ों एकड़ में खड़ी धान की फसल खेतों में गिर गई है. फसल लगभग 80 प्रतिशत तक पक चुकी थी, लेकिन बारिश और हवा के चलते धान की बालियां पानी में डूब गई हैं. इससे किसानों को फसल बर्बाद होने की आशंका सता रही है.
किसान राघवेंद्र सिंह ने बताया कि उनके क्षेत्र में नाटी धान की फसल तैयार होने की स्थिति में थी. शाम से तेज हवा चलने और बारिश होने के कारण भारी हो चुकी धान की फसल खेतों में गिर गई. खेतों में पानी भरने से धान की बालियां भी पानी में डूब गई हैं. उनका कहना है कि यदि पानी में डूबी बालियां इसी तरह रहीं तो वे सड़ जाएंगी और पूरी फसल खराब हो सकती है.
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राघवेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले साल भी इसी समय मोंथा तूफान आया था, जिससे किसानों की धान की फसल को नुकसान हुआ था. गेहूं की फसल के समय भी तूफान आने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था. इसके बावजूद किसानों को अब तक फसल नुकसान का मुआवजा नहीं मिला है.
राघवेंद्र ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि फसल नुकसान के बाद जब लेखपाल को बुलाया जाता है तो उनकी ओर से मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं होने की बात कही जाती है. वहीं, बैंक से संपर्क करने पर भी किसानों को यही जवाब मिलता है. ऐसे में हर बार प्राकृतिक आपदा से फसल बर्बाद होने के बाद किसानों को नुकसान खुद ही उठाना पड़ता है.

