लक्ष्मीकांत बंसोड़, बालोद। जिले के आदिवासी विकासखंड डौंडी में ग्रामीणों ने मिसाल पेश करते हुए अपनी मेहनत और सहयोग से गांव के जर्जर प्राथमिक शाला भवन की मरम्मत कराई है। स्कूल भवन की खराब हालत के कारण लंबे समय से बच्चों को पढ़ाई करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। कई बार छत का प्लास्टर गिरने के साथ ही बारिश के दौरान छत से पानी टपकता था। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों में भी चिंता बनी हुई थी।

ग्रामीणों के मुताबिक, स्कूल भवन की जर्जर स्थिति को लेकर कई बार शासन-प्रशासन से मदद की गुहार लगाई गई। ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने समस्या रखी और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए भवन की मरम्मत कराने की मांग की, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।
आखिरकार ग्रामीणों ने खुद ही समस्या का समाधान करने का फैसला लिया। गांव में बैठक बुलाकर जर्जर भवन को तोड़कर नई छत बनाने का प्रस्ताव रखा गया। इसके बाद ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से प्रत्येक घर से करीब 600 से 700 रुपये चंदा जुटाना शुरू किया। देखते ही देखते ग्रामीणों ने करीब 3 लाख रुपये एकत्र कर लिए।
इस राशि से स्कूल भवन की जर्जर छत को तुड़वाकर नई छत का निर्माण कराया गया। इसके साथ ही भवन की आवश्यक मरम्मत भी कराई गई, ताकि बच्चों को सुरक्षित माहौल में पढ़ाई करने में किसी तरह की परेशानी न हो।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को जर्जर भवन में पढ़ते देख उन्हें लगातार डर बना रहता था। कभी छत का प्लास्टर गिरने की घटना सामने आती थी तो कभी बारिश में पानी टपकने लगता था। ऐसी स्थिति में बच्चों को जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करनी पड़ रही थी। जब प्रशासन की ओर से अपेक्षित मदद नहीं मिली तो ग्रामीणों ने आपसी एकजुटता दिखाते हुए स्वयं ही स्कूल भवन को दुरुस्त कराने का बीड़ा उठाया।
ग्रामीणों की इस पहल से अब स्कूल भवन की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हो गई है और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई करने की व्यवस्था हो गई है। गांव वालों का यह प्रयास सरकारी व्यवस्था के भरोसे बैठे रहने के बजाय सामूहिक सहयोग से समस्या का समाधान करने की एक मिसाल भी बन गया है।
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