राजकुमार दुबे, भानुप्रतापपुर। विश्व पर्यावरण दिवस पर जहां पर्यावरण संरक्षण के बड़े-बड़े संकल्प लिए जा रहे थे, पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे। वहीं भानुप्रतापपुर वन परिक्षेत्र के बांसला की पहाड़ी से सामने आई तस्वीरों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए। जंगल में आग धधकती रही और पेड़ जलते रहे।

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विश्व पर्यावरण दिवस के दिन सामने आया यह दृश्य न केवल वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि उन लोगों की मानसिकता को भी उजागर करता है जो हर साल जंगलों में आग लगाकर प्रकृति को नुकसान पहुंचाते हैं।

विडंबना यह है कि जिस दिन पर्यावरण संरक्षण की सबसे अधिक चर्चा होती है, उसी दिन जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आ जाती हैं। आग से न केवल पेड़-पौधों को नुकसान पहुंचता है बल्कि वन्यजीवों का जीवन भी संकट में पड़ जाता है।

शायद ग्राम बांसला की पहाड़ी के पेड़ भी पर्यावरण दिवस मना रहे थे—फर्क सिर्फ इतना था कि कहीं पौधों को पानी दिया जा रहा था और यहां पेड़ों को आग। एक तरफ “पेड़ लगाओ” के नारे गूंज रहे थे, दूसरी तरफ जंगल खुद मदद की गुहार लगा रहा था।

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