जगदलपुर। डिमरापाल मेडिकल कॉलेज में इसी सत्र से पैरामेडिकल के डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। पहले चरण में 90 सीटों पर विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा, जिसमें सीटी स्कैन, एक्स-रे, एमआरआई और ऑपरेशन थिएटर जैसे क्षेत्र शामिल होंगे। खास बात यह है कि प्रशिक्षण केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यार्थियों को आधुनिक चिकित्सा उपकरणों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी मिलेगा। शरीर रचना विज्ञान, शरीर क्रिया विज्ञान, पैथोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री जैसे विषय भी पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे।

पैरामेडिकल स्टाफ अस्पताल की वह महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसके बिना आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था पूरी नहीं हो सकती। मरीज की जांच से लेकर रिपोर्ट तैयार करने और ऑपरेशन थिएटर तक इनकी भूमिका अहम रहती है। पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद सरकारी सेवा में नियमित नियुक्ति का अवसर युवाओं के लिए इसे और आकर्षक बना रहा है। स्थानीय युवाओं को स्वास्थ्य क्षेत्र में करियर के लिए बस्तर से बाहर जाने की जरूरत भी कम होगी। इससे एक तरफ युवाओं को रोजगार का रास्ता मिलेगा तो दूसरी तरफ बस्तर के अस्पतालों को प्रशिक्षित तकनीकी मानव संसाधन मिल सकेगा। यानी डिमरापाल में शुरू होने वाला पैरामेडिकल पाठ्यक्रम शिक्षा के साथ रोजगार और स्वास्थ्य व्यवस्था, तीनों मोर्चों पर बड़ा बदलाव ला सकता है।

दंतेवाड़ा – बैलाडीला में सिमटती जा रही विश्वकर्मा पूजा की परंपरा

दंतेवाड़ा। हर साल 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा के मौके पर श्रद्धालु परिवार सहित बैलाडीला की वादियों तक पहुंचते रहे हैं, लेकिन खदान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था के चलते आम नागरिकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। इस फैसले से उन परिवारों में निराशा है, जिनके लिए यह सिर्फ पूजा नहीं बल्कि वर्षों पुरानी परंपरा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विश्वकर्मा पूजा के दौरान बैलाडीला की प्राकृतिक खूबसूरती देखना भी इस आयोजन का हिस्सा बन चुका है। समय के साथ पहले दोपहिया वाहनों पर रोक लगी, फिर प्रवेश सीमित हुआ और अब पूरी तरह प्रतिबंध की स्थिति है।

हालांकि प्रबंधन स्थानीय हॉकी ग्राउंड में विश्वकर्मा पूजा का आयोजन करने की तैयारी कर रहा है, लेकिन लोगों का कहना है कि पहाड़ियों के बीच भगवान विश्वकर्मा के दर्शन और पूजा का अनुभव अलग है। अब नागरिक सुरक्षा और आस्था के बीच संतुलन बनाने की मांग कर रहे हैं। लोगों ने सुझाव दिया है कि निजी वाहनों की जगह निर्धारित रूट पर विशेष बस सेवा चलाई जाए। सुरक्षा जांच के बाद सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को बसों से ले जाकर वापस लाने की व्यवस्था हो सकती है। इससे सुरक्षा मानकों का पालन भी होगा और बैलाडीला से जुड़ी पुरानी धार्मिक परंपरा भी पूरी तरह टूटने से बच सकेगी।

आसमान से बरसा पानी किसानों के लिए राहत

जगदलपुर। कई दिनों से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों को गुरुवार से शुरू हुई बारिश ने बड़ी राहत दी है। शुक्रवार को भी रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी रहा और खेतों में पानी की स्थिति सुधरने लगी। बारिश नहीं होने से खासकर टिकरा खेतों में नमी बनाए रखना किसानों के लिए चुनौती बन गया था। धान की फसल के मौजूदा चरण में पानी की जरूरत बढ़ गई थी और किसान फसल पर असर को लेकर चिंतित थे। अब बारिश होने से खेतों में नमी लौटी है और फसल को फायदा मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

किसानों के लिए यह बारिश इसलिए भी अहम है क्योंकि समय पर पानी मिलने से धान की बढ़वार बेहतर हो सकती है। हालांकि मौसम विभाग की भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है। जिला प्रशासन ने स्कूलों में छुट्टी कर विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। नदी-नालों, जलभराव वाले क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में आवागमन की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। यानी किसानों के लिए बारिश जहां संजीवनी बनकर आई है, वहीं प्रशासन के सामने अब अत्यधिक बारिश से निपटने की चुनौती भी है।

कोंडागांव – भंगाराम जात्रा पारंपरिक न्याय व्यवस्था की पहचान

कोंडागांव। इस वर्ष ऐतिहासिक भंगाराम जात्रा 12 सितंबर को आयोजित की जाएगी। केशकाल घाटी के ऊपर मां भंगाराम देवी के दरबार में नौ परगना क्षेत्र के करीब 55 राजस्व गांवों के देवी-देवता प्रतिनिधियों के साथ पहुंचेंगे। यहां आधुनिक अदालत नहीं, बल्कि सदियों पुरानी लोक परंपरा के अनुसार देवी-देवताओं से जुड़ी शिकायतों की सुनवाई होती है। मान्यता है कि बीमारी, आपदा, अकाल या फसल खराब होने जैसी परेशानियों को देवी-देवताओं से जोड़कर देखा जाता है। ऐसी स्थिति में संबंधित देवी-देवता के प्रतिनिधि भंगाराम देवी के दरबार में अपनी बात रखते हैं।

गायता, सिरहा, मांझी और गांव के मुखिया इस पारंपरिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। देवी-देवताओं के प्रतीकों और उनके गांव से जुड़ी जानकारी भी इस दौरान दर्ज की जाती है। लोक मान्यता के अनुसार दोष सामने आने पर संबंधित देवी-देवता के लिए दंड का भी प्रावधान है। कहीं निलंबन तो कहीं मान्यता समाप्त करने जैसे पारंपरिक फैसले सुनाए जाने की मान्यता है। हालांकि यह कानूनी न्यायालय नहीं बल्कि आदिवासी संस्कृति और लोक आस्था से जुड़ी पारंपरिक व्यवस्था है। इसी अनूठी परंपरा के कारण भंगाराम जात्रा बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को देश-दुनिया के सामने अलग स्वरूप देती है।

आश्रम-छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल

जगदलपुर। बस्तर विधायक एवं उपनेता प्रतिपक्ष लखेश्वर बघेल ने अलग-अलग आश्रम-छात्रावासों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान कहीं अधीक्षिका तो कहीं सुरक्षा कर्मियों की अनुपस्थिति सामने आने की बात कही गई। मधोता कन्या आश्रम में अधीक्षिका की गैरमौजूदगी में व्यवस्था रसोइए और स्वीपर के भरोसे दिखाई दी। करीब 50 बच्चों के लिए भोजन में दाल की मात्रा को लेकर भी सवाल उठाए गए। चित्तलवार आश्रम में भी अधीक्षिका और सुरक्षा कर्मियों की अनुपस्थिति तथा बच्चों की पढ़ाई और बिजली व्यवस्था को लेकर सवाल सामने आए।

रोतमा बालक आश्रम में जर्जर भवन और भोजन की गुणवत्ता ने बच्चों की सुरक्षा तथा स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ाई। निरीक्षण के दौरान राशन के रखरखाव और मेस व्यवस्था पर भी सवाल उठे। विधायक ने कहा कि जिन बच्चों की जिम्मेदारी शासन ने ली है, उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता। बच्चों की सुरक्षा, भोजन, स्वच्छता, पढ़ाई और राशन व्यवस्था की नियमित निगरानी की जरूरत है। सवाल यह है कि बच्चों के नाम पर मिलने वाली सुविधाएं आखिर जमीन पर बच्चों तक कितनी पहुंच रही हैं। विधायक ने लापरवाही बर्दाश्त नहीं करने की बात कहते हुए व्यवस्थाओं में सुधार और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई है।

दंतेवाड़ा – अटल लैब की जांच रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर सवाल

दंतेवाड़ा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरीश कवासी ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर अटल लैब की जांच प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि लैब से जारी कुछ जांच रिपोर्टों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। अगर पैथोलॉजी रिपोर्ट में ही गड़बड़ी हो तो डॉक्टर के सामने मरीज की बीमारी का सही आकलन करना चुनौती बन सकता है। इसी वजह से उन्होंने लैब में इस्तेमाल हो रही मशीनों और उपकरणों की तकनीकी जांच की मांग उठाई है। लैब के लिए खरीदे गए उपकरणों की गुणवत्ता और खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल लगाए गए हैं। टेंडर प्रक्रिया, उपकरणों की गुणवत्ता और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग आवेदन में की गई है।

मामला केवल मशीनों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीजों को मिलने वाली जांच रिपोर्ट की विश्वसनीयता से भी जुड़ा है। स्वास्थ्य सुविधा का उद्देश्य मरीज को सही जांच और भरोसेमंद रिपोर्ट उपलब्ध कराना है। ऐसे में आरोपों की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि लैब की रिपोर्टों और खरीद प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल अटल लैब की व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी पर भी बहस शुरू कर दी है।

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