Bastar News Update : सुकमा. पोलमपल्ली स्थित पोटाकेबिन और आरएमएसए छात्रावास में बच्चों के बीमार पड़ने के मामले में प्रशासन ने अब जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है. बच्चों को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 28 और 29 अगस्त को शिविर लगाकर सभी बच्चों की स्वास्थ्य जांच की. मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने भी 29 अगस्त को संस्था का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान संचालन में गंभीर कमियां सामने आने के बाद पोटाकेबिन की अधीक्षिका पदमलता मौर्य को निलंबित कर दिया गया. उनके स्थान पर सहायक शिक्षक वैजयंती चंद्रा को संस्था का प्रभार सौंपा गया है. यह कार्रवाई संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बस्तर की ओर से की गई है. प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अब छात्रावास की व्यवस्थाओं पर निगरानी बढ़ने की उम्मीद है. खासकर बच्चों के स्वास्थ्य, भोजन, स्वच्छता और आवासीय व्यवस्था को लेकर जिम्मेदारी तय करने पर जोर रहेगा. आवासीय संस्थानों में बड़ी संख्या में बच्चे रहते हैं, ऐसे में छोटी सी लापरवाही भी गंभीर स्थिति पैदा कर सकती है. यही वजह है कि पोलमपल्ली की घटना के बाद प्रशासन ने स्वास्थ्य परीक्षण के साथ जिम्मेदार अधिकारी पर भी कार्रवाई की है. अब जरूरत है कि आगे ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए व्यवस्था की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए.

एक्सप्रेसवे से बस्तर के बाजारों को मिलेगी नई रफ्तार

कांकेर. रायपुर से विशाखापटनम के बीच बन रहा 465 किलोमीटर लंबा इकोनॉमिक कॉरिडोर बस्तर के लिए सिर्फ तेज आवागमन का रास्ता नहीं, बल्कि कारोबार के नए अवसर लेकर आने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है. छह लेन का यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे रायपुर और विशाखापटनम के बीच मौजूदा 597 किलोमीटर की दूरी को करीब 465 किलोमीटर तक सीमित कर देगा. इसके बनने के बाद बस्तर, कांकेर और कोंडागांव जैसे इलाकों की कनेक्टिविटी सीधे बड़े बाजारों और विशाखापटनम पोर्ट से जुड़ जाएगी. कांकेर-कोंडागांव के बीच 2.83 किलोमीटर लंबी ट्विन टनल इस परियोजना की बड़ी विशेषता है. पहाड़ी और जंगल वाले क्षेत्र में बन रही यह सुरंग प्रदेश की प्रमुख इंजीनियरिंग उपलब्धियों में शामिल होगी. वहीं ओडिशा सीमा के पास एलिवेटेड वियाडक्ट भी बनाया जा रहा है. बेहतर सड़क संपर्क से बस्तर की कृषि और वनोपज को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी. महुआ, इमली, धान और हस्तशिल्प जैसे उत्पादों के परिवहन में समय और लागत कम होने की उम्मीद है. करीब 20 हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस कॉरिडोर के 2027 तक शुरू होने की संभावना है. ऐसे में एक्सप्रेसवे बस्तर के लिए सड़क से ज्यादा आर्थिक विकास की नई लाइफलाइन बन सकता है.

छात्रावासों में बुनियादी सुविधाओं की मांग

जगदलपुर. बस्तर में आदिवासी विद्यार्थियों के लिए संचालित आवासीय संस्थानों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं. आदिवासी युवा छात्र संगठन ने आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर कई समस्याओं के समाधान की मांग की है. संगठन ने गढ़िया स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय को बेसोली स्थित बालक छात्रावास में शिफ्ट किए जाने के बाद कक्षों की कमी का मुद्दा उठाया है. संगठन का कहना है कि सीमित जगह के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. बेसोली में उपचारित पेयजल की व्यवस्था नहीं होने को भी गंभीर समस्या बताया गया है. यहां आरओ प्लांट लगाने के साथ पानी की सप्लाई के लिए अतिरिक्त मोटर लगाने की मांग की गई है. संगठन ने जिले के सभी आश्रम-छात्रावासों में आरओ, नियमित स्वास्थ्य जांच और फर्स्ट एड किट उपलब्ध कराने की मांग रखी है. कन्या क्रीड़ा परिसर में लंबे समय से बंद हाईमास्ट लाइट को शुरू कराने की मांग भी की गई है. इसके अलावा बेसोली परिसर में सीसी सड़क बनाने की जरूरत बताई गई है. संगठन का कहना है कि बेहतर शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल देना भी विभाग की जिम्मेदारी है.

हेमराज की मौत ने रावघाट की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए

कांकेर. रावघाट माइंस से प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर किए जा रहे दावों के बीच 12 वर्षीय हेमराज कुमेटी की मौत ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. फूलपाड़ निवासी हेमराज की तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे बीएसपी द्वारा संचालित अस्पताल लेकर पहुंचे थे. इसके बाद उसे नारायणपुर के निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी गंभीर हालत को देखते हुए बड़े अस्पताल में उपचार की जरूरत बताई गई. परिवार का आरोप है कि बेहतर चिकित्सा सुविधा और एंबुलेंस की व्यवस्था में हुई देरी के बीच बच्चे की हालत लगातार बिगड़ती गई और उसकी मौत हो गई. इस घटना की सबसे मार्मिक तस्वीर रक्षाबंधन के दिन सामने आई, जब बहनों ने भाई की कलाई पर राखी बांधने के बजाय उसके शव को राखी बांधकर अंतिम विदाई दी. हेमराज की मौत ने यह सवाल खड़ा किया है कि प्रभावित गांवों के गंभीर मरीजों के लिए तत्काल रेफरल की व्यवस्था कितनी मजबूत है. 37 प्रभावित गांवों के लिए स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी के बीच विशेषज्ञ उपचार, एंबुलेंस और बड़े अस्पताल तक पहुंच की व्यवस्था पर जवाब मांगा जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि केवल स्वास्थ्य केंद्र होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आपात स्थिति में तत्काल इलाज और रेफरल की सुविधा भी जरूरी है. अब इस पूरे मामले में स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियों की समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है.

गंजेनार कन्या आश्रम पर सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में अंतर का आरोप

सुकमा. छिंदगढ़ ब्लॉक के गंजेनार कन्या आश्रम को लेकर अब शिक्षा व्यवस्था और सरकारी रिकॉर्ड के बीच अंतर का सवाल खड़ा हो गया है. जिला पंचायत उपाध्यक्ष महेश कुंजाम ने आरोप लगाया है कि करीब ढाई महीने से बंद पड़े 50 सीटर कन्या आश्रम की छात्राओं के स्कूल जाने को लेकर विभाग ने जो जानकारी दी है, वह जमीनी स्थिति से मेल नहीं खाती. विभाग की ओर से 37 छात्राओं के गांव के स्कूलों और बाकी छात्राओं के गुडरा स्थित स्कूल में पढ़ने की जानकारी देने का दावा किया गया था. इसके बाद गांवों में जाकर पड़ताल करने पर कई छात्राओं के स्कूल नहीं जाने की बात सामने आने का आरोप लगाया गया. एक मामले में तो जिस गांव की बच्ची के स्कूल जाने का दावा किया गया, वहां स्कूल ही बंद होने की बात कही गई. कुछ छात्राओं के स्कूल जाने के बजाय घर के काम और मवेशी चराने में लगे होने की जानकारी भी सामने आने का दावा किया गया है. इससे विभागीय निगरानी और रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं. जिला पंचायत उपाध्यक्ष ने छात्राओं के नाम पर जारी छात्रवृत्ति, भोजन और अन्य मदों की राशि की भी जांच की मांग की है. साथ ही आश्रम की अधीक्षिका की कथित अनुपस्थिति और उनके पूर्व में दिए गए आवेदन के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया है. अब मांग है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए और लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए.

प्रशिक्षण शिविर से संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की कवायद

जगदलपुर. बस्तर में कांग्रेस के तीन दिवसीय संभाग स्तरीय प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर फोकस रहा. गणपति रिसॉर्ट में आयोजित शिविर में संभाग के ब्लॉक अध्यक्षों और मास्टर ट्रेनर्स को संगठनात्मक कामकाज और जनसंवाद के तरीकों की जानकारी दी गई. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व मंत्री मोहन मरकाम और ताम्रध्वज साहू समेत दिल्ली से पहुंचे प्रशिक्षकों ने पदाधिकारियों का मार्गदर्शन किया. प्रशिक्षण में बूथ और ब्लॉक स्तर पर संगठन की सक्रियता बढ़ाने के साथ कार्यकर्ताओं और जनता के बीच लगातार संवाद बनाए रखने पर जोर दिया गया. प्रशिक्षकों ने आधुनिक संगठनात्मक कार्यप्रणाली और जनसंवाद के नए माध्यमों की जानकारी भी दी. स्थानीय मुद्दों को समझकर उन्हें जनता के बीच प्रभावी तरीके से उठाने की रणनीति पर चर्चा हुई. वक्ताओं ने कहा कि किसी भी संगठन की मजबूती उसकी जमीनी सक्रियता से तय होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए ब्लॉक अध्यक्षों और मास्टर ट्रेनर्स को आगामी गतिविधियों के लिए तैयार किया जा रहा है. प्रशिक्षण के अंतिम दिन संगठन की आगामी कार्ययोजना और विस्तार से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी. कुल मिलाकर बस्तर में यह प्रशिक्षण शिविर संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है.

धरमपुरा में पहली बार बहेगी भागवत ज्ञान की गंगा, बारिश के बीच निकली भव्य कलश यात्रा

जगदलपुर. धरमपुरा में पहली बार सार्वजनिक रूप से श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है. कथा शुरू होने से पहले आज श्रद्धा और उत्साह के साथ शहर में कलश यात्रा निकाली गई. खास बात यह रही कि बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में माताएं, बहनें और श्रद्धालु कलश यात्रा में शामिल हुए. वृंदावन से पहुंचे अनादि जी महाराज की व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया जाएगा. बताया जा रहा है कि करीब 6 किलोमीटर लंबी कलश यात्रा निकाली गई, जिसमें शहर और धरमपुरा क्षेत्र के श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ शामिल हुए. कल से जगदलपुर के सौंदिक भवन, एलआईसी कार्यालय मार्ग में श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ होगा. आयोजन समिति के अनुसार, यह आयोजन पूरे नगरवासियों के सहयोग से किया जा रहा है और कथा में शामिल होने के लिए बाहर से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. कथा के दौरान प्रतिदिन शाम को आरती होगी, जिसके बाद प्रसाद वितरण किया जाएगा. वहीं श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसाद की व्यवस्था भी आयोजन समिति की ओर से की गई है.

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