Bastar News Update : जगलदपुर. बस्तर की बांस कला देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान रखती है, लेकिन इस हुनर से जुड़े शिल्पी आज कच्चे माल के संकट से जूझ रहे हैं. सरकारी काष्ठागारों और उपभोक्ता डिपो से बांस नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी स्तर पर खरीदारी करनी पड़ रही है. शिल्पियों के मुताबिक करीब दस साल पहले 20 से 25 रुपए में मिलने वाला बांस अब 100 रुपए में भी आसानी से उपलब्ध नहीं है. कच्चा बांस खरीदने के लिए उन्हें आसपास के गांवों का रुख करना पड़ रहा है. कुरंदी, कुलगांव, जाटम, पोडागुड़ा, पुषपाल और मुरमा जैसे गांवों से बांस खरीदा जा रहा है. परिवहन समेत एक बांस की कीमत करीब 500 रुपए तक पहुंचने की बात शिल्पी बता रहे हैं. इसका सीधा असर बांस से बनने वाली टोकरी, सजावटी सामान और दूसरी उपयोगी वस्तुओं की लागत पर पड़ा है. शिल्पियों का कहना है कि कच्चे बांस की कीमत बढ़ने से तैयार उत्पाद महंगे हो रहे हैं और बिक्री भी प्रभावित हो रही है. कच्चे बांस की जरूरत के बावजूद वन विभाग से नियमित आपूर्ति नहीं होने की शिकायत सामने आ रही है. परंपरागत रूप से रियायती दर पर बांस उपलब्ध कराने की व्यवस्था करीब 12 वर्षों से बंद होने की बात कही जा रही है. शिल्पियों ने बस्तर से जुड़े वन मंत्री से इस समस्या पर गंभीर पहल करने की मांग की है. उनका कहना है कि सस्ता और व्यवस्थित कच्चा माल मिले तो पारंपरिक बांस कला को फिर मजबूत आधार मिल सकता है. सवाल अब यही है कि बस्तर की पहचान बने इस हुनर को बाजार के साथ-साथ कच्चे माल की सरकारी व्यवस्था कब मिलेगी.

खनन क्षेत्र में दिखा तेंदुआ, विकास के बीच वन्यजीवों की सुरक्षा बनी चुनौती

कांकेर. जिले के अंजरेल क्षेत्र में खनन गतिविधियों के बीच तेंदुए की मौजूदगी ने वन्यजीव संरक्षण पर नया सवाल खड़ा कर दिया है. अंजरेल की पहाड़ी स्थित खनन क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारी ने तेंदुए को देखा और सुरक्षित दूरी से तस्वीर कैमरे में कैद की. तस्वीर सामने आने के बाद क्षेत्र में वन्यजीवों की मौजूदगी को लेकर लोगों में उत्सुकता के साथ सतर्कता भी बढ़ गई है. अंजरेल रावघाट लौह अयस्क परियोजना के डिपॉजिट-एफ क्षेत्र का हिस्सा है. यहां मशीनों, भारी वाहनों और श्रमिकों की लगातार आवाजाही रहती है. ऐसे सक्रिय खनन क्षेत्र में तेंदुए का दिखना आसपास के जंगलों में उसके आवागमन का संकेत माना जा रहा है. तेंदुआ संरक्षित वन्यजीव है और इसे परेशान करना या उसके करीब जाने की कोशिश खतरनाक हो सकती है. वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार तस्वीर लेने के लिए जानवर का पीछा करने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी है. अंजरेल सहित परियोजना क्षेत्र में सात ब्लॉक प्रस्तावित और विकसित किए जाने वाले क्षेत्र में शामिल हैं. ऐसे में भविष्य में बढ़ने वाली मानवीय गतिविधियों के बीच वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन पर ध्यान देना जरूरी होगा. खनन क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों और वाहन चालकों को भी वन्यजीवों की संभावित मौजूदगी को लेकर सतर्क रहना होगा. तेंदुआ दिखने पर भीड़ जुटाने या उसका रास्ता रोकने के बजाय तत्काल वन विभाग को सूचना देना सुरक्षित कदम होगा. अंजरेल की घटना विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत को एक बार फिर सामने ला रही है.

छात्रवृत्ति परीक्षा से पहले हजारों विद्यार्थियों ने परखी अपनी तैयारी

जगदलपुर. राष्ट्रीय साधन-सह-प्रवीण छात्रवृत्ति परीक्षा की तैयारी को मजबूत करने के लिए बस्तर जिले में बड़े स्तर पर मॉक टेस्ट आयोजित किया गया. समग्र शिक्षा की पहल पर जिले के 111 परीक्षा केंद्रों में 6,654 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा में हिस्सा लिया. मॉक टेस्ट का उद्देश्य विद्यार्थियों को मुख्य परीक्षा के माहौल से पहले ही परिचित कराना रहा. बस्तर विकासखंड में सबसे अधिक 1,603 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी. इसके अलावा बकावंड में 1,350, जगदलपुर में 1,031 और लोहंडीगुड़ा में 850 विद्यार्थी शामिल हुए. तोकापाल में 849, दरभा में 636 और बास्तानार में 335 विद्यार्थियों ने अपनी तैयारी जांची. परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों ने समय प्रबंधन और प्रश्न हल करने की गति को भी परखा. मॉक टेस्ट से छात्रों को अपनी कमजोरियों और तैयारी में सुधार की जरूरत वाले विषयों का पता चल सकेगा. शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया. केंद्रों पर बैठक व्यवस्था, उपस्थिति और प्रश्नपत्र वितरण की प्रक्रिया की निगरानी की गई. अधिकारियों के मुताबिक नियमित अभ्यास से परीक्षा का डर कम होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है. मॉक टेस्ट को मुख्य परीक्षा से पहले विद्यार्थियों की तैयारी को धार देने की अहम कड़ी माना जा रहा है. अब विद्यार्थियों की नजर मुख्य छात्रवृत्ति परीक्षा पर है, जहां इस अभ्यास का वास्तविक परिणाम सामने आएगा.    

नीलगाय का शिकार करने वाले 6 गिरफ्तार

बीजापुर. इंद्रावती टाइगर रिजर्व में वन्यजीव शिकार के खिलाफ चल रही कार्रवाई में वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है. शिकार के मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया. न्यायालय ने सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है. वन विभाग के अनुसार 19 अगस्त को कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से वन्यप्राणी का मांस बरामद किया गया. मांस संभावित रूप से नीलगाय का बताया गया है. मौके से शिकार में इस्तेमाल की जाने वाली अन्य सामग्री भी बरामद की गई. कार्रवाई के दौरान इंद्रावती टाइगर रिजर्व के विभिन्न क्षेत्रों का मैदानी अमला मौजूद रहा. मानसून के दौरान लगातार बारिश के बावजूद वन विभाग की गश्त जारी है. बढ़े जलस्तर और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच कर्मचारी संवेदनशील इलाकों में पैदल निगरानी कर रहे हैं. विभाग का फोकस शिकार की घटनाओं पर रोक लगाने के साथ सूचना तंत्र को मजबूत करने पर भी है. स्थानीय ग्रामीणों से वन्यजीवों के शिकार या वन अपराध से जुड़ी किसी भी गतिविधि की जानकारी देने की अपील की गई है. वन विभाग का कहना है कि वन्यजीवों की सुरक्षा केवल सरकारी अमले की नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय की भी साझा जिम्मेदारी है. इंद्रावती टाइगर रिजर्व में शिकार के खिलाफ आने वाले दिनों में भी निगरानी और कार्रवाई जारी रहने की बात कही गई है.

बारिश ने खोली सड़क की पोल, नारायणपुर-अंतागढ़ मार्ग पर सफर बना चुनौती

नारायणपुर. नारायणपुर-अंतागढ़ मुख्य मार्ग पर बारिश के बाद सड़क की बदहाल स्थिति ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है. कई हिस्सों में पानी भरने से बड़े-बड़े गड्ढे दिखाई नहीं दे रहे हैं और सड़क की सतह कीचड़ में बदल गई है. भारी वाहनों की आवाजाही ने कमजोर सड़क पर दबाव और बढ़ा दिया है. छोटे वाहन चालक फिसलन और गड्ढों के बीच बेहद सावधानी से सफर करने को मजबूर हैं. इस मार्ग से जुड़े कई गांवों के लिए सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि मुख्यालय तक पहुंचने की जीवनरेखा है. सड़क खराब होने के कारण बस सेवा प्रभावित होने से ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. लोगों को निजी वाहनों या दूसरे साधनों से सफर करना पड़ रहा है, जिससे यात्रा का खर्च भी बढ़ गया है. सबसे गंभीर चुनौती मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए है, जिन्हें समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो सकता है. विद्यार्थियों, कर्मचारियों, मजदूरों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है. निर्माणाधीन मार्ग पर रावघाट और अमदई माइंस से जुड़े भारी वाहनों की आवाजाही भी सवालों के घेरे में है. लगातार बारिश के बीच भारी वाहनों का दबाव सड़क की हालत को और खराब कर रहा है. ग्रामीण अब अस्थायी मरम्मत के बजाय सड़क की स्थायी समस्या का समाधान चाहते हैं. सवाल यह है कि हर मानसून में सामने आने वाली इस परेशानी का स्थायी समाधान आखिर कब होगा.

ब्लैक फिल्म पर पुलिस का एक्शन, 50 वाहनों से मौके पर हटाई गई फिल्म

जगदलपुर. शहर में यातायात नियमों के पालन को लेकर पुलिस ने अब वाहनों के शीशों पर लगी ब्लैक फिल्म के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है. सिटी कोतवाली और यातायात पुलिस की संयुक्त टीम ने शहर के अलग-अलग स्थानों पर वाहनों की जांच की. जांच के दौरान नियमों के विपरीत ब्लैक फिल्म लगाए करीब 50 वाहन पकड़े गए. पुलिस ने मौके पर ही वाहनों के शीशों से ब्लैक फिल्म हटवाई. अभियान का उद्देश्य सिर्फ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना भी रहा. पुलिस ने वाहन चालकों को समझाया कि निर्धारित मानकों के अनुरूप ही वाहन के कांच का इस्तेमाल किया जाए. ब्लैक फिल्म हटने से वाहनों के अंदर और बाहर की दृश्यता बेहतर रहने की बात पुलिस ने कही है. पुलिस के मुताबिक आगामी जांच में नियमों का उल्लंघन मिलने पर चालानी कार्रवाई की जाएगी. इसलिए वाहन चालकों से स्वेच्छा से अपने वाहनों की ब्लैक फिल्म हटाने की अपील की गई है. अभियान एसपी चंद्र मोहन सिंह के निर्देशन और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में चलाया गया. कार्रवाई में सिटी कोतवाली और यातायात शाखा के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे. पुलिस का कहना है कि यातायात नियमों का पालन शहर की व्यवस्था और सड़क सुरक्षा दोनों के लिए जरूरी है. ब्लैक फिल्म के खिलाफ यह अभियान आने वाले दिनों में भी जारी रहने की बात कही गई है.

Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H