Bastar News Update : जगदलपुर. किसानों को गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है. नियमों की अनदेखी करने वाली जिले की 24 कृषि आदान विक्रेता फर्मों के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं. विभाग के मुताबिक इन दुकानदारों को कई बार नियमों के पालन और दस्तावेज अपडेट करने के निर्देश दिए गए थे. इसके बावजूद लाइसेंस की शर्तों का पालन नहीं करने पर विभागीय जांच के बाद कार्रवाई की गई. सबसे ज्यादा कार्रवाई बकावंड ब्लॉक में हुई, जहां आठ फर्मों के अनुज्ञा पत्र निरस्त किए गए हैं. बस्तर ब्लॉक की पांच, जगदलपुर और तोकापाल की चार-चार फर्में भी कार्रवाई के दायरे में आई हैं. इन सभी दुकानदारों को अब परिसर में मौजूद कीटनाशक का स्टॉक 30 दिन के भीतर हटाना होगा. निर्धारित समय में स्टॉक नहीं हटाने पर शेष माल को राजसात करने की कार्रवाई की जाएगी. उपसंचालक कृषि राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि प्रिंसिपल सर्टिफिकेट समय पर अपडेट करना अनिवार्य था. विभाग ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस की शर्तों से समझौता किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा. आने वाले दिनों में अन्य विक्रेताओं की भी जांच कर नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. लाइसेंस निरस्तीकरण से असंतुष्ट फर्में कीटनाशी अधिनियम 1968 के तहत अपील कर सकती हैं. विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य किसानों को मानक और सुरक्षित कृषि आदान उपलब्ध कराना है.

भोपालपट्टनम में दफ्तरों की व्यवस्था पर कमिश्नर की नजर

बीजापुर. दूरस्थ भोपालपट्टनम में प्रशासनिक कामकाज की जमीनी स्थिति जांचने संभागायुक्त डोमन सिंह ने कई कार्यालयों का निरीक्षण किया. निरीक्षण का फोकस सिर्फ कार्यालयों की व्यवस्था नहीं, बल्कि आम लोगों से जुड़े मामलों के समय पर निराकरण पर रहा. उन्होंने एसडीएम और तहसील कार्यालय के साथ जनपद पंचायत और शिक्षा विभाग के दफ्तरों का जायजा लिया. तहसील कार्यालय में राजस्व प्रकरणों और महत्वपूर्ण दस्तावेजों के रख-रखाव की स्थिति देखी गई. रिकॉर्ड रूम को निर्वाचन के स्ट्रांग रूम की तर्ज पर सुरक्षित और व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए गए. कमिश्नर ने कहा कि पुराने राजस्व अभिलेखों को सुरक्षित रखने के साथ जरूरत पड़ने पर उन्हें आसानी से उपलब्ध कराया जाए. भू-अर्जन से जुड़े मामलों में भी रिकॉर्ड दुरुस्तीकरण समय पर पूरा करने को कहा गया. जनपद पंचायत में विभिन्न योजनाओं की प्रगति और ई-ऑफिस व्यवस्था की समीक्षा की गई. शिक्षा विभाग के कार्यालयों में पंजियों और दस्तावेजों का निरीक्षण कर रिकॉर्ड अपडेट रखने के निर्देश दिए गए. अधिकारियों से कहा गया कि कार्यालयीन कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही स्पष्ट दिखाई देनी चाहिए. आम लोगों से जुड़े प्रकरणों को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखने की हिदायत दी गई. निरीक्षण के जरिए प्रशासन ने दूरस्थ क्षेत्रों में सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली को चुस्त करने का संदेश दिया है. अब अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी कि निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देशों का जमीनी स्तर पर पालन सुनिश्चित करें.

मरीजों की सुविधा के बीच रेल व्यवस्था की परेशानी

जगदलपुर. किरंदुल-विशाखापट्टनम नाइट एक्सप्रेस से सफर करने वाले यात्रियों की परेशानी अब सुविधाओं से जुड़ी बड़ी मांग में बदलती जा रही है. सबसे ज्यादा दिक्कत उन मरीजों को होती है जो इलाज के लिए विशाखापट्टनम की ओर सफर करते हैं. ट्रेन के जगदलपुर पहुंचने पर प्लेटफार्म बदलने की स्थिति में मरीजों को फुटओवर ब्रिज का सहारा लेना पड़ता है. स्टेशन पर लिफ्ट की सुविधा नहीं होने से व्हीलचेयर पर मरीजों को ले जाना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है. दो पटरियों के बीच मरीजों को सुरक्षित तरीके से ले जाने के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आई है. यात्रियों की मांग है कि नाइट एक्सप्रेस को जगदलपुर में प्लेटफार्म नंबर एक पर ही लाया जाए. इससे बुजुर्गों, मरीजों और दिव्यांग यात्रियों को काफी राहत मिल सकती है. यात्रियों ने ट्रेन के समय में बदलाव की मांग भी उठाई है. फिलहाल जगदलपुर से ट्रेन शाम करीब 7.30 बजे रवाना होकर तड़के चार बजे विशाखापट्टनम पहुंचती है. यात्रियों का सुझाव है कि ट्रेन को रात नौ बजे रवाना किया जाए, जिससे सुबह के समय विशाखापट्टनम पहुंचा जा सके. तड़के पहुंचने वाले यात्रियों को होटल और स्थानीय परिवहन की सुविधा लेने में भी परेशानी होती है. इस संबंध में रेल अधिकारियों तक मांग पहुंचने के बावजूद अब तक ठोस बदलाव नहीं होने की शिकायत है. यात्रियों का कहना है कि रेल सुविधा में मामूली बदलाव भी मरीजों और दूसरे यात्रियों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है.

ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों पर सख्ती

जगदलपुर. त्योहारी सीजन में बाजारों और प्रमुख सड़कों पर बढ़ने वाली भीड़ के बीच यातायात पुलिस ने जांच अभियान तेज कर दिया है. शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और बाजार क्षेत्रों में नियम तोड़ने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई की गई. अभियान के दौरान करीब 100 वाहन चालकों के खिलाफ चालानी कार्रवाई की गई है. पुलिस ने बिना हेलमेट दोपहिया चलाने वालों को विशेष रूप से कार्रवाई के दायरे में लिया. इसके अलावा तीन सवारी बैठाने और बिना नंबर प्लेट वाहन चलाने वालों पर भी जुर्माना लगाया गया. वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने वालों पर भी पुलिस ने सख्ती दिखाई. पूरे अभियान में करीब 45 हजार 700 रुपए का जुर्माना वसूला गया. त्योहारों के दौरान बाजारों में बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए यातायात व्यवस्था पर निगरानी बढ़ाई गई है. पुलिस का कहना है कि सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं होगी. दोपहिया चालकों से हेलमेट पहनने और निर्धारित संख्या में ही सवारी बैठाने की अपील की गई है. वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करने की भी सख्त हिदायत दी गई है. पुलिस ने साफ किया है कि त्योहारी सीजन में जांच अभियान लगातार जारी रहेगा. उद्देश्य सिर्फ चालान काटना नहीं, बल्कि शहर में सुरक्षित और व्यवस्थित यातायात सुनिश्चित करना है.  

नक्सल दंश खत्म होने के बाद बुनियादी सुविधाओं का इंतजार

नारायणपुर. नक्सल प्रभाव कम होने के बाद सीमावर्ती गांवों में विकास की उम्मीद बढ़ी है, लेकिन जमीनी तस्वीर अभी भी कई सवाल खड़े कर रही है. कावानार गांव के स्कूल निरीक्षण में लंबे समय से शिक्षक के अनुपस्थित रहने की शिकायत सामने आई. जिला पंचायत सदस्य राकेश उसेंडी ने शिक्षक की गैरहाजिरी को बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला बताया. उन्होंने जिम्मेदार शिक्षक पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है. तोयामेटा में प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक स्कूल एक ही परिसर में संचालित हो रहे हैं. निरीक्षण के दौरान स्कूल भवन का हिस्सा क्षतिग्रस्त और छत की स्थिति खराब मिली. जर्जर भवन में बच्चों की पढ़ाई को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंता भी सामने आई. स्कूल में दाल-चावल और दूसरी जरूरी व्यवस्थाओं को लेकर भी शिकायतें मिलीं. रसोइया को समय पर मानदेय नहीं मिलने की बात भी निरीक्षण में सामने आई. अंदरूनी इलाकों में कहीं आंगनबाड़ी भवन की जगह झोपड़ीनुमा व्यवस्था तो कहीं घरों में कक्षाएं संचालित होने की स्थिति बताई गई. खराब सड़कें और पुल-पुलियों की कमी बरसात में ग्रामीणों की मुश्किल और बढ़ा देती है. दो नदियों वाले इस सीमावर्ती क्षेत्र में कई जगह ग्रामीणों को आज भी जोखिम लेकर आवागमन करना पड़ता है. राकेश उसेंडी ने सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देने की मांग की है. उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभाव कम होने के बाद अब विकास की रफ्तार गांवों तक पहुंचना जरूरी है.

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