Bastar News Update : दंतेवाड़ा. जिले के गीदम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं का अभाव मरीजों की परेशानी बढ़ा रहा है. जानकारी के अनुसार जीवनरक्षक मलेरिया इंजेक्शन तक उपलब्ध नहीं है, जिससे चिंता और बढ़ गई है. ड्रेसिंग रूम में वेंटिलेशन नहीं होने से मरीजों और कर्मचारियों को घुटन का सामना करना पड़ रहा है. फिजियोथेरेपी सेवा सीमित समय तक संचालित होने से जरूरतमंद मरीजों को पूरा लाभ नहीं मिल रहा. बारिश के दौरान पर्ची काउंटर की छत से पानी टपकने से दवाइयों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं. चिकित्सकों के चैंबर से जुड़े शौचालयों की खराब सफाई व्यवस्था लोगों की नाराजगी का कारण बनी हुई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत के बाद भी हालात नहीं बदले हैं. स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्थिति प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े कर रही है. क्षेत्रवासियों ने अस्पताल का औचक निरीक्षण कराने की मांग उठाई है. साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार की मांग की गई है. लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार ही मरीजों को वास्तविक राहत दिला सकता है.
सड़क नेटवर्क मजबूत करने दिल्ली पहुंची बस्तर की आवाज
जगदलपुर. बस्तर के सड़क विकास को लेकर सांसद महेश कश्यप ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की. उन्होंने क्षेत्र के सड़क नेटवर्क को आधुनिक बनाने संबंधी विस्तृत प्रस्ताव सौंपा. प्रस्ताव में भारतमाला परियोजना से जगदलपुर को जोड़ने के लिए रिंग रोड और बायपास की मांग प्रमुख रही. चित्रकोट जलप्रपात तक पहुंचने वाले जगदलपुर-चित्रकोट मार्ग को फोरलेन करने का भी आग्रह किया गया. नगरनार स्टील प्लांट और ओडिशा सीमा तक बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया. दंतेवाड़ा, बीजापुर और तेलंगाना सीमा तक राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार की भी मांग की गई. सांसद ने कहा कि बेहतर सड़कें व्यापार, पर्यटन और निवेश को नई गति देंगी. उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क मजबूत करने पर भी जोर दिया. ब्लैक स्पॉट सुधार, फ्लाईओवर और रेलवे ओवरब्रिज निर्माण का विषय भी उठाया गया. सड़क सुविधाएं बढ़ने से रोजगार और उद्योगों के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद जताई गई. प्रस्तावों के अमल से बस्तर की क्षेत्रीय और अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी मजबूत होने की संभावना है. अब इन मांगों पर केंद्र सरकार के निर्णय का इंतजार रहेगा.
राशन व्यवस्था पर उठे सवाल, जांच के बाद होगा फैसला
जगदलपुर. बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड के शिवनागुड़ा गांव में राशन वितरण को लेकर शिकायतें सामने आई हैं. हितग्राहियों ने आरोप लगाया कि पूरा खाद्यान्न दिए बिना पहले बायोमेट्रिक सत्यापन कराया गया. कुछ लोगों का कहना है कि राशन की जगह केवल चना और नमक दिया गया. शक्कर नहीं मिलने के बावजूद रिकॉर्ड में वितरण दर्ज होने का भी आरोप लगाया गया है. दुकान संचालक ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए चावल उपलब्ध होने पर वितरण की बात कही है. ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें निर्धारित मात्रा में राशन नहीं मिल रहा है. मामले को लेकर ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग उठाई है. खाद्य निरीक्षक ने स्वयं मौके पर पहुंचकर जांच करने की बात कही है. उन्होंने कहा कि यदि अनियमितता मिली तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. आवश्यकता पड़ने पर दुकान संचालन की जिम्मेदारी भी बदली जा सकती है. जांच रिपोर्ट आने के बाद पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी. फिलहाल ग्रामीण निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
खिलाड़ियों के लिए बड़ा मौका, राज्य खेल अलंकरण हेतु आवेदन शुरू
जगदलपुर. बस्तर जिले के खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के लिए राज्य स्तर पर सम्मान पाने का अवसर खुल गया है. खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने वर्ष 2025-26 के राज्य खेल अलंकरण पुरस्कारों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. जिले के खिलाड़ी, प्रशिक्षक, निर्णायक और खेल संस्थाएं आवेदन कर सकती हैं. योजना के तहत कई प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे. इसके साथ नगद प्रोत्साहन, प्रेरणा निधि और डायट मनी का भी प्रावधान है. निर्धारित प्रारूप में आवेदन जिला खेल कार्यालय जगदलपुर में जमा किए जाएंगे. खेल उपलब्धियों के आधार पर पात्र प्रतिभागियों का चयन किया जाएगा. विभाग ने अधिक से अधिक खिलाड़ियों से आवेदन करने की अपील की है. यह योजना प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को सम्मानित करने का महत्वपूर्ण माध्यम मानी जा रही है. युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के लिए यह बड़ा मंच साबित हो सकता है. आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 5 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है. इच्छुक खिलाड़ी समय सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें.
गीदम-दंतेवाड़ा सड़क बनी हादसों का रास्ता
दंतेवाड़ा. जिले में गीदम से जिला मुख्यालय को जोड़ने वाली प्रमुख सड़क लगातार बारिश के बाद बदहाल हो गई है. मार्ग पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढे वाहन चालकों के लिए खतरा बन गए हैं. रोजाना दोपहिया चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं. हाल ही में एक युवक गड्ढे में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया. स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सड़क की गुणवत्ता पहली ही बारिश में जवाब दे गई. नालियों का पानी सड़क पर आने से गड्ढे और अधिक खतरनाक हो रहे हैं. समीप स्थित मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है. क्षेत्रवासियों के अनुसार लगभग हर दिन छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं. वाहनों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. लोगों ने सड़क के साथ बेहतर जल निकासी व्यवस्था की मांग उठाई है. स्थायी और गुणवत्तापूर्ण मरम्मत कराने की मांग लगातार तेज हो रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो बड़ा हादसा हो सकता है.
बारिश के बीच दौड़ी संरक्षण की मुहिम
बीजापुर. जिले के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर जनभागीदारी आधारित कार्यक्रम आयोजित किए गए.
मुख्य आकर्षण ‘रन फॉर इंद्रावती’ मैराथन रही. 5 और 10 किलोमीटर की दौड़ में करीब 150 धावकों ने भाग लिया. प्रतिभागी बीजापुर सहित कई जिलों से पहुंचे. मूसलाधार बारिश भी प्रतिभागियों का उत्साह कम नहीं कर सकी. दौड़ के माध्यम से बाघ और वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया गया. कार्यक्रम के दौरान चित्रकला और पेंटिंग प्रतियोगिताएं भी आयोजित हुईं. विजेताओं को अतिथियों ने सम्मानित किया. बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया. वन विभाग और सामाजिक संस्थाओं ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम को सफल बनाया. आयोजन को जनभागीदारी आधारित संरक्षण की सकारात्मक पहल बताया गया. प्रकृति संरक्षण के संदेश के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.
समय पर रेस्क्यू से बचीं 16 जिंदगियां
नारायणपुर. जिले के ग्राम चिकपाल में अचानक बढ़े जलस्तर ने 16 ग्रामीणों को बाढ़ के बीच फंसा दिया. सूचना मिलते ही पुलिस, आईटीबीपी और जिला बाढ़ बचाव दल मौके पर पहुंचा. संयुक्त टीम ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में राहत अभियान शुरू किया. फंसे लोगों में बच्चे, महिलाएं और पुरुष शामिल थे. तेज बहाव के बावजूद सभी ग्रामीणों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. रेस्क्यू अभियान के दौरान किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई. बचाव के बाद सभी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया. अधिकारियों ने इसे टीमवर्क और त्वरित कार्रवाई का परिणाम बताया. पुलिस ने लोगों से नदी-नालों को पार न करने की अपील की है. बारिश के दौरान सतर्कता बरतने की सलाह भी दी गई है. समय पर मिली सूचना ने संभावित बड़े हादसे को टाल दिया. प्रशासन लगातार संवेदनशील क्षेत्रों पर निगरानी बनाए हुए है.
भारी बारिश से मेड़ टूटी, गांवों का संपर्क भी टूटा
कोंडागांव. जिले के बरकई क्षेत्र में लगातार बारिश के बीच बंधा मतोर की मेड़ टूटने से सड़क ध्वस्त हो गई. बरकई-चरकई मार्ग पूरी तरह बंद होने से कई गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया. ग्रामीणों को मुख्यालय पहुंचने के लिए लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है. स्कूली बच्चों और किसानों की आवाजाही सबसे अधिक प्रभावित हुई है. तेज बहाव में कई किसानों की फसलें भी नष्ट हो गईं. मछली पालन के लिए डाला गया बीज भी पानी में बह गया. ग्रामीणों ने नुकसान का सर्वे कर मुआवजा देने की मांग उठाई है. साथ ही सड़क के तत्काल पुनर्निर्माण की मांग की गई है. हर वर्ष ऐसी स्थिति बनने से स्थायी समाधान की मांग तेज हो गई है. ग्रामीणों ने सुरक्षा दीवार बनाने का सुझाव भी दिया है. बारिश ने क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं की कमजोर तैयारी उजागर कर दी है. अब सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है.
निर्माण स्थल बना खतरा, मासूम की गई जान
कोंडागांव. शहर के कोपाबेड़ा जलाशय सौंदर्याकरण कार्य के दौरान बड़ा हादसा हो गया. निर्माणाधीन नाले में गिरने से छह वर्षीय बच्ची की मौत हो गई. स्थानीय लोगों ने बच्ची को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया. चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है. स्थानीय लोगों ने निर्माण स्थल पर सुरक्षा इंतजाम नहीं होने का आरोप लगाया. बताया गया कि न तो बैरिकेडिंग थी और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए थे. ग्रामीणों ने पहले भी ऐसे हादसे होने की बात कही. ठेकेदार और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है. साथ ही सभी निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने की मांग उठी है. लोगों का कहना है कि लापरवाही दोबारा किसी परिवार पर भारी नहीं पड़नी चाहिए.

बिना अनुमति खनन पर उठे बड़े सवाल
सुकमा. जिले के तुमालपाड़ क्षेत्र में कथित अवैध खनन को लेकर विवाद गहरा गया है. आरोप है कि बिना वैध खनन अनुमति के लंबे समय से ब्लास्टिंग और पत्थर निकासी हो रही है. खनिज विभाग ने भी संबंधित स्थल पर अनुमति जारी नहीं होने की बात स्वीकार की है. इसके बावजूद बड़े स्तर पर गतिविधियां जारी रहने से सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है. दूसरी ओर सामान्य मामलों में विभाग द्वारा तत्काल कार्रवाई किए जाने की बात भी सामने आई है. इसी कारण विभाग के दोहरे रवैये पर सवाल खड़े हो रहे हैं. क्षेत्र में सड़क निर्माण से जुड़े अन्य ठेकेदार अनुमति के लिए महीनों से इंतजार कर रहे हैं. मामला सामने आने के बाद खनिज विभाग ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया है. अब यह देखना होगा कि जांच के बाद क्या कदम उठाए जाते हैं. स्थानीय स्तर पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग लगातार बढ़ रही है. यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और नियमों के पालन की परीक्षा बन गया है.
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