Bastar News Update, बस्तर: इस बार रक्षाबंधन का पर्व शुभ संयोगों के बीच मनाया जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक करीब 27 साल बाद पर्व भद्रा मुक्त रहेगा। रक्षाबंधन पर सुकर्मा, बुधादित्य, उभयचरी, सर्वार्थ सिद्धि और त्रिपुष्कर योग बन रहे हैं। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त से शुरू होकर 28 अगस्त सुबह करीब 9:45 बजे तक रहेगी।

उदय व्यापिनी मान्यता के अनुसार 28 अगस्त को ही रक्षाबंधन मनाया जाएगा। राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया गया है। वहीं सुबह 10:46 से दोपहर 12:22 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस दौरान शुभ कार्य से बचने की परंपरा है। भारत में चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण इसका पर्व पर प्रभाव नहीं माना जाएगा। ब्राह्मण यज्ञोपवीत बदलेंगे और गुरु-पुरोहित भी रक्षा सूत्र बांधेंगे।

जंगल बचाने के नाम पर वन भूमि कब्जे पर बड़ी कार्रवाई

बस्तर: माचकोट के जंगलों में वन भूमि और पेड़ों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने सख्ती दिखाई है। गुरु गोठान गांव के आसपास अतिक्रमण और पेड़ों को नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया। कार्रवाई के दौरान वन विभाग ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वन भूमि पर कब्जे की गतिविधियों के साथ पेड़ों को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा था। पेड़ों के तनों की छाल चारों ओर से छीलकर उन्हें सुखाने की कोशिश की जा रही थी।

वन विभाग के मुताबिक इस प्रक्रिया को गर्डलिंग कहा जाता है। मामला उप-परिक्षेत्र पुलचा का है, जहां गश्त के दौरान टीम को गतिविधियों की जानकारी मिली। मौके पर पहुंची टीम ने कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को हिरासत में लिया। सभी के खिलाफ वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया है। बाद में आरोपियों को सक्षम न्यायालय में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश पर सभी 13 आरोपियों को केंद्रीय जेल जगदलपुर भेज दिया गया। विभाग ने जंगल और वन भूमि को नुकसान पहुंचाने वालों पर आगे भी कार्रवाई की बात कही है।

जिंदगी की जंग जीत लौटा बच्चा, करैत के जहर से लेकर मलेरिया तक से मुकाबला

बीजापुर से गंभीर हालत में डिमरापाल लाया गया बच्चा अब खतरे से बाहर है। 22 अगस्त की शाम करीब साढ़े चार बजे बच्चे को जिला अस्पताल से रेफर किया गया था। डिमरापाल पहुंचने तक उसकी हालत बेहद नाजुक थी और वह गैसपिंग अवस्था में था। चिकित्सकों के मुताबिक करैत सांप के काटने से न्यूरोटॉक्सिक विष का असर दिखाई दे रहा था। बच्चा कोमा में था और रेस्पिरेटरी फेल्योर के चलते उसे तत्काल वेंटिलेटर पर रखा गया। इलाज के दौरान गंभीर एनीमिया और एस्पिरेशन निमोनिया की भी चुनौती सामने आई। हीमोग्लोबिन महज 6.2 ग्राम प्रति डेसीलीटर था। इसके साथ फाल्सीपेरम मलेरिया और शॉक ने बच्चे की हालत और गंभीर कर दी। पीडियाट्रिक आईसीयू में तीन दिन तक वेंटिलेटर पर इलाज चला। इसके बाद 42 घंटे तक नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन की जरूरत पड़ी। बच्चे को दो बार रक्त चढ़ाया गया और ब्रेन मलेरिया का भी उपचार किया गया। लगातार उपचार के बाद अब बच्चे की स्थिति खतरे से बाहर बताई गई है।

खाद की कालाबाजारी पर सबसे बड़ा शिकंजा, 62 विक्रेताओं पर कार्रवाई

बस्तर: खरीफ सीजन में किसानों को खाद की उपलब्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जांच अभियान चलाया गया। इस अभियान में बस्तर जिला कार्रवाई के मामले में पूरे संभाग में सबसे आगे रहा। उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत संभाग के छह जिलों में कुल 72 प्रकरण दर्ज हुए। इनमें अकेले बस्तर जिले में 62 उर्वरक विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई।

तीन विक्रेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। तीन विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त किए गए, जबकि 28 पर बिक्री प्रतिबंध लगाया गया। 12 मामलों को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया और 12 मामलों में जब्ती की कार्रवाई हुई। कोण्डागांव में चार और कांकेर में छह प्रकरण सामने आए। सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर में कोई प्रकरण दर्ज नहीं हुआ।

दंतेवाड़ा जैविक जिला होने के कारण इन आंकड़ों में शामिल नहीं है। वहीं कोण्डागांव से लगी ओडिशा सीमा के गांवों में खाद की कथित कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आई हैं। ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी और कार्रवाई को लेकर किसानों की नजर अब विभाग पर है।

260 मीटर की पटरियां बदलेंगी किरंदुल रेल लाइन की तस्वीर

दंतेवाड़ा: किरंदुल-बचेली रेल मार्ग पर अब ट्रैक निर्माण की तस्वीर बदलती नजर आ रही है। भिलाई इस्पात संयंत्र से तैयार की गई लंबी रेल पटरियां बस्तर पहुंच रही हैं। 130 मीटर लंबी रेल को अब 260 मीटर के वेल्डेड पैनल के रूप में तैयार किया जा रहा है। इन पटरियों को महासमुंद, रायगढ़ और कोरापुट होते हुए किरंदुल भेजा जा रहा है।

भांसी से किरंदुल के बीच चल रहे रेल लाइन दोहरीकरण में इनका इस्तेमाल किया जाएगा। बुधवार को ऐसी 12 पटरियों को एक रेलगाड़ी से किरंदुल रवाना किया गया। लंबी पटरियों के इस्तेमाल से ट्रैक पर वेल्डिंग के जोड़ कम होते हैं। इससे रेल संचालन में सुरक्षा और गति बढ़ाने में मदद मिल सकती है। जगदलपुर रेलवे स्टेशन से गुजरते समय इतनी लंबी पटरियां यात्रियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनीं। भिलाई इस्पात संयंत्र में भारतीय रेलवे के लिए आधुनिक तकनीक से इन पटरियों का निर्माण हो रहा है। अब किरंदुल रेल लाइन के दोहरीकरण के साथ ट्रैक की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर है। ऐसे में लंबी रेल पटरियां बस्तर की रेल कनेक्टिविटी के विस्तार में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

त्योहारों की किताब में दर्ज होगी बस्तर की सांस्कृतिक पहचान

बस्तर के पारंपरिक त्योहार अब सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए अध्ययन का विषय बन रहे हैं। सेजेस करंजी के प्राचार्य विश्व मोहन मिश्रा का आलेख ‘बस्तर के पंडुम’ राज्यस्तरीय कार्यशाला में शामिल किया गया। आलेख में बस्तर के त्योहारों को कृषि, प्रकृति, पशुधन और सामुदायिक जीवन से जोड़ा गया है। बस्तर दशहरा, गोंचा, माटी तिहार, नवाखाई, दियारी और छेरछेरा की परंपराओं को इसमें स्थान मिला है। इन पंडुमों के जरिए बस्तर की जीवनशैली और प्रकृति के साथ लोगों के रिश्ते को समझाया गया है। राज्यस्तरीय मंच पर आलेख को जगह मिलना सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कलेक्टर आकाश छिकारा ने प्राचार्य विश्व मोहन मिश्रा को बधाई दी है। जिला शिक्षा अधिकारी बलिराम बघेल ने इसे विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ने वाली पहल बताया। प्राचार्य मिश्रा के मुताबिक आने वाली पीढ़ी बस्तर के तीज-त्योहारों को समझ सके, यही प्रयास है। उनका मानना है कि पंडुम बस्तर की पहचान और संस्कृति के जीवंत प्रतीक हैं। शिक्षा के जरिए इन परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। यानी विकास के साथ बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को बचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m