पटना। नेता प्रतिपक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने 12 वर्षीय प्रिंस से मुलाकात की है। यह मुलाकात उस समय चर्चा का विषय बन गई जब प्रिंस ने अपनी आपबीती साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम के दौरान गंभीर आरोप लगाए। इस पूरी घटना का वीडियो तेजस्वी यादव ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर भी साझा किया है, जिसके बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
गंगा किनारे वीडियो बनाने पर मारपीट का आरोप
नाबालिग प्रिंस ने तेजस्वी यादव को विस्तार से बताया कि वह पटना में गंगा किनारे आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम का वीडियो बना रहा था। इसी दौरान कुछ अज्ञात लोगों ने उसे रोक लिया और उसके साथ कथित तौर पर मारपीट की। एक छोटे बच्चे के साथ इस प्रकार का बर्ताव किए जाने से वह बुरी तरह डर गया था। प्रिंस ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि किस तरह से उसे सार्वजनिक स्थल पर निशाना बनाया गया और उसके मोबाइल या कैमरे से छेड़छाड़ करने का प्रयास किया गया।
पुलिस पर गंभीर आरोप
मामला जब आगे बढ़ा और पुलिस तक पहुंचा, तो प्रिंस ने खाकी की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े किए। उसका आरोप है कि घटना की निष्पक्ष जांच करने के बजाय पुलिसकर्मियों ने उल्टा उसे ही डराया-धमकाया। प्रिंस के मुताबिक, पुलिस ने उस पर अनुचित दबाव बनाया ताकि वह अपनी मर्जी से नहीं बल्कि उनके बताए अनुसार बयान दे। एक नाबालिग बच्चे पर इस तरह का मानसिक दबाव बनाना और उसे धमकाना पुलिस प्रशासन के कामकाज पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
तेजस्वी यादव की कड़ी प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने प्रिंस और उसके परिवार को सांत्वना दी। तेजस्वी यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी नाबालिग बच्चे के साथ मारपीट करना और उस पर जबरन बयान दिलवाने का दबाव बनाना अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने इस घटना में शामिल मुख्य आरोपियों के साथ-साथ इसमें संलिप्त पाए जाने वाले दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की मांग की है। तेजस्वी ने जोर देकर कहा कि इस मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और पीड़ित को न्याय मिल सके।
निष्कर्ष और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता
हालांकि 12 वर्षीय प्रिंस द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी या प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मामले की वास्तविक और कानूनी स्थिति पुलिस व प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। लेकिन इस घटना ने बाल अधिकारों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के पालन को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है।



