Bastar News Update : सुकमा. नक्सलियों की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए शुरू हुई तेंदूपत्ता खरीदी अब सुकमा में खुद ही दम तोड़ती नजर आ रही है. महज 3-4 दिन बाद फड़ों पर ताले लटक गए और सिस्टम की सुस्ती ने पूरा खेल बिगाड़ दिया. सरकारी खरीदी ठप होते ही बिचौलिए सक्रिय हो गए हैं. सीमावर्ती इलाकों से तेंदूपत्ता ओडिशा तस्करी हो रहा है. शबरी नदी पार कर नावों से दिनदहाड़े पत्ता भेजा जा रहा है. जहां ओडिशा में 220 रुपए किलो तक कीमत है, वहीं यहां ग्रामीण 3.50 में बेचने को मजबूर हैं. ग्रामीणों के घरों में पत्ता डंप पड़ा है, लेकिन खरीदी नहीं हो रही. बाइक से जंगल रास्तों के जरिए तस्करी का नेटवर्क फैल चुका है. प्रशासन ने सिर्फ पुल पर नाका लगाया, बाकी रास्ते खुले हैं. सरकारी रिकॉर्ड में पत्ता नहीं चढ़ने से बोनस भी खत्म हो गया. योजना का मकसद नक्सल फंडिंग रोकना था, लेकिन अब उल्टा असर दिख रहा है. आदिवासियों का रोजगार संकट में है और बिचौलियों की चांदी हो रही है. सवाल यही है क्या सिस्टम की सुस्ती नक्सलियों से बड़ी चुनौती बन गई है?
कैच द रेन से जंगलों में जल क्रांति की तैयारी
बस्तर. बस्तर के जंगल अब पानी से अपनी किस्मत बदलने की तैयारी में हैं. वन विभाग ने ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत बड़ा जल संवर्धन मिशन शुरू किया है. पहाड़ियों पर 1.8 लाख कंटूर ट्रेंच बनाकर पानी जमीन में उतारा जा रहा है. 1.3 लाख चेक डैम से नालों में मिट्टी कटाव रोका जा रहा है. 3.1 लाख से ज्यादा जल संरचनाओं का लक्ष्य तय किया गया है. सबसे खास है ‘सीड बॉल’ तकनीक, जिससे दुर्गम पहाड़ियों पर हरियाली लाई जाएगी. मानसून में बीज बिखराकर प्राकृतिक वनीकरण किया जाएगा. सूखी लकड़ियों से चेक डैम बनाकर ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल अपनाया गया है. इससे वनाग्नि का खतरा भी कम होगा. जल स्तर बढ़ेगा तो वन्यजीवों को भी राहत मिलेगी. यह अभियान सिर्फ पानी नहीं, पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने की कोशिश है. बस्तर में यह पहल भविष्य की पर्यावरण सुरक्षा की मजबूत नींव बन सकती है.
Bastar News Update : एकतरफा प्यार बना जानलेवा हमला
बस्तर/बकावंड. बस्तर में एकतरफा प्यार का जुनून खौफनाक वारदात में बदल गया. बकावंड थाना क्षेत्र में 11वीं की छात्रा पर जानलेवा हमला हुआ. आरोपी ने शादी का प्रस्ताव ठुकराए जाने पर रंजिश पाल ली थी. रात में फोन कर युवती को घर से बाहर बुलाया गया. इसके बाद सिर, गर्दन और सीने पर ताबड़तोड़ हमला किया गया. चीख सुनकर परिजन पहुंचे, लेकिन आरोपी फरार हो गया. गंभीर हालत में छात्रा का इलाज जारी है. घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है. परिजन कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है. यह घटना कानून व्यवस्था के साथ सामाजिक मानसिकता पर भी सवाल खड़े करती है. प्यार के नाम पर हिंसा आखिर कब रुकेगी?
Bastar News Update : समर स्पेशल ट्रेन से यात्रियों को राहत
जगदलपुर. गर्मी की भीड़ के बीच यात्रियों को राहत देने के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं. जगदलपुर से हजरत निजामुद्दीन के लिए 21 मई को ट्रेन रवाना होगी. 22 कोच वाली इस ट्रेन में स्लीपर और जनरल दोनों सुविधाएं रहेंगी. यह ट्रेन कोरापुट, रायपुर, नागपुर होते हुए दिल्ली पहुंचेगी. 23 मई को सुबह निजामुद्दीन पहुंचने का समय तय है. वापसी में 25 मई को ट्रेन दिल्ली से चलेगी. इसके अलावा विशाखापट्टनम से भी स्पेशल ट्रेन चलाई जा रही है. इससे दक्षिण से उत्तर भारत तक कनेक्टिविटी बढ़ेगी. यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने में आसानी होगी. रेलवे ने यात्रा से पहले समय सारिणी जांचने की अपील की है. भीषण गर्मी में यह सेवा यात्रियों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है. त्योहार और छुट्टियों में भीड़ कम करने की कोशिश है.
टेलिंग डैम हादसा… एक साल बाद भी खतरा बरकरार
बचेली. जगदलपुर में टेलिंग डैम हादसे को एक साल बीत गया, लेकिन खतरा अभी खत्म नहीं हुआ. लाखों टन मलबा आज भी मौके पर जमा पड़ा है. सुरक्षा दीवार तक नहीं बनाई गई है. बारिश में फिर हादसे का डर मंडरा रहा है. निरीक्षण हुए, टीम आई, लेकिन कार्रवाई नजर नहीं आई. ट्रकों के लिए बनाया गया वैकल्पिक रास्ता भी विवादों में है. तालाब और सुविधाएं मलबे में दब गईं. वन भूमि पर अतिक्रमण के आरोप भी लगे हैं. स्थानीय लोग इसे बड़ी लापरवाही मान रहे हैं. जिम्मेदारी तय करने की बजाय अतिरिक्त जमीन देने पर सवाल उठ रहे हैं. नगर पालिका ने भी नाराजगी जताई है. सवाल है क्या हादसे के बाद भी सबक नहीं लिया गया?
बंद फैक्ट्री बनी ‘जलता जाल’, बच्चे झुलसे
जगदलपुर. जगदलपुर की एक बंद फैक्ट्री अब मौत का जाल बन चुकी है. बलिराम कश्यप वार्ड में जमीन के नीचे आज भी आग धधक रही है. खेलते-खेलते चार बच्चे इसकी चपेट में आकर झुलस गए. जमीन धंसते ही बच्चे आग में गिर गए. घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई है. स्थानीय लोग लंबे समय से खतरे की चेतावनी दे रहे थे. लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए. नगर निगम अब घेराबंदी और जांच की बात कर रहा है. बच्चों का इलाज अस्पताल में जारी है. यह हादसा लापरवाही की बड़ी कीमत बनकर सामने आया है. सवाल उठ रहा है कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई? क्या हादसे के बाद ही सिस्टम जागेगा?
अधर में अटका आदिवासी विश्राम भवन
जगदलपुर. जगदलपुर में आदिवासी विश्राम भवन का निर्माण दो साल से अधर में लटका है..4 करोड़ की स्वीकृति के बाद काम शुरू हुआ था. पहली किस्त से नींव और कॉलम तक काम पहुंचा..लेकिन सरकार बदलते ही बजट रुक गया. अब निर्माण पूरी तरह ठप है. संभागभर से आने वाले आदिवासियों को ठहरने में परेशानी हो रही है. समाज ने कई बार बजट की मांग की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई. अब जनसहयोग से निर्माण पूरा करने की तैयारी है. पुराना भवन पहले ही जर्जर घोषित हो चुका था. यह सिर्फ भवन नहीं, जरूरत का केंद्र है. लंबित निर्माण विकास की रफ्तार पर सवाल खड़ा कर रहा है. देखना होगा सरकार पहल करती है या समाज खुद आगे आता है.
युवा मोर्चा में संगठन विस्तार
बस्तर. बस्तर में युवा मोर्चा ने संगठन विस्तार करते हुए नए मण्डल अध्यक्षों की घोषणा की है. जिले के 13 मण्डलों में नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपी गई है. जगदलपुर, बकावंड, तोकापाल, दरभा समेत सभी क्षेत्रों में नियुक्तियां हुई हैं. स्थानीय नेतृत्व को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है. नए अध्यक्षों को संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है. ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पकड़ मजबूत करने की रणनीति है. युवा नेतृत्व के जरिए जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने की कोशिश है. आगामी चुनावी समीकरणों को भी ध्यान में रखा गया है. नए पदाधिकारियों के सामने प्रदर्शन की चुनौती होगी. संगठन विस्तार से राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के संकेत हैं. अब नजर रहेगी कि ये नियुक्तियां कितना असर दिखाती हैं.
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