Bastar News Update : जगदलपुर. बस्तर में स्वास्थ्य सेवाओं की नई तस्वीर सामने आ रही है. डिमरापाल स्थित कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल ने अपने संचालन के 100 दिन पूरे कर लिए हैं. इन सौ दिनों में पांच हजार से अधिक मरीजों ने ओपीडी सेवाओं का लाभ उठाया, जबकि 250 से ज्यादा गंभीर मरीजों की जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की गई. सबसे बड़ी उपलब्धि बस्तर की पहली अत्याधुनिक कैथ लैब की शुरुआत रही है. अब एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी और पेसमेकर जैसी सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हैं. किडनी रोगियों के लिए 180 से अधिक सफल डायलिसिस किए गए हैं. गैस्ट्रो विभाग में एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी जैसी जांचों से मरीजों को राहत मिली है. अत्याधुनिक पैथोलॉजी में 30 हजार से ज्यादा जांचें की जा चुकी हैं. आयुष्मान भारत योजना के तहत सैकड़ों जरूरतमंद मरीजों का निःशुल्क उपचार भी किया गया. इससे बस्तर और सीमावर्ती ओडिशा के मरीजों को बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ रहा. विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक तकनीक के कारण इलाज अब पहले से कहीं अधिक आसान और सुलभ हो गया है. स्वास्थ्य क्षेत्र में यह बदलाव बस्तर के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरा है.
15 जुलाई के बाद बंद हो सकता है राशन, हजारों परिवार अभी भी ई-केवाईसी से दूर
जगदलपुर. बस्तर जिले में राशन कार्डधारकों के लिए समय तेजी से निकलता जा रहा है. खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि 15 जुलाई के बाद ई-केवाईसी का दूसरा अवसर नहीं मिलेगा. जिले में 83 हजार से अधिक हितग्राहियों का सत्यापन अभी भी लंबित है. सबसे ज्यादा चिंता जगदलपुर और बस्तर ब्लॉक की है, जहां हजारों सदस्य प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं. विभाग का उद्देश्य अपात्र, मृत और डुप्लीकेट नामों को सूची से हटाना है. राशन दुकानों में आधार आधारित मशीनों से सत्यापन कराया जा रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और बायोमेट्रिक समस्या भी बड़ी वजह बनी हुई है. कई परिवारों में विवाह या स्थान परिवर्तन के कारण भी रिकॉर्ड अपडेट नहीं हो पाया. प्रशासन ने सभी विकासखंडों में विशेष अभियान शुरू किया है. अतिरिक्त कर्मचारियों की भी तैनाती की गई है ताकि लंबित मामलों का जल्द निपटारा हो सके. विभाग ने लोगों से अंतिम तारीख का इंतजार नहीं करने की अपील की है. समय रहते ई-केवाईसी नहीं कराने वालों का राशन और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावित हो सकता है.
बारिश ने खोली बाजार की बदहाली, व्यापारियों और ग्राहकों की बढ़ी परेशानी
जगदलपुर. बारिश शुरू होते ही जगदलपुर का सबसे बड़ा थोक व्यापारिक केंद्र संजय बाजार बदहाल नजर आने लगा है. बाजार के कई हिस्सों में आज भी कंक्रीट नहीं होने से कीचड़ और गंदगी फैल गई है. रोजाना हजारों ग्राहक और व्यापारी इसी रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं. सब्जी, किराना, खाद्य तेल, वनोपज और मांस कारोबार का प्रमुख केंद्र होने के बावजूद मूलभूत सुविधाएं अधूरी हैं. कच्चे हिस्सों में बारिश का पानी जमा होने से बदबू लगातार बढ़ रही है. सड़ी-गली सब्जियां और व्यापारिक कचरा हालात को और खराब कर रहे हैं. व्यापारियों का कहना है कि पिछले पांच वर्षों से कंक्रीट और बेहतर ड्रेनेज की मांग की जा रही है. बाजार में नए शेड तो बनाए जा रहे हैं, लेकिन जल निकासी व्यवस्था अब भी अधूरी है. इसका सीधा असर व्यापार और ग्राहकों की आवाजाही पर पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात में बाजार तक पहुंचना चुनौती बन जाता है. व्यापारी जल्द स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं. अब निगाहें इस बात पर हैं कि जिम्मेदार एजेंसियां कब इस समस्या का समाधान करती हैं.
चर्च में नियुक्ति विवाद से बढ़ी खींचतान, समाज दो गुटों में बंटा
जगदलपुर. जगदलपुर के डैनियल मेमोरियल मेथोडिस्ट चर्च में नए पास्टर की नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा गया है. शुक्रवार को चर्च परिसर में समाज के लोग दो अलग-अलग पक्षों में नजर आए. एक पक्ष ने नए पास्टर की नियुक्ति का विरोध करते हुए बदलाव की मांग की. विरोध करने वालों ने पूर्व कार्यकाल से जुड़े कई आरोप भी लगाए हैं. दूसरी ओर समर्थक पक्ष ने नियुक्ति को संस्था का अधिकृत निर्णय बताया. उनका कहना है कि सभी प्रक्रियाएं नियमानुसार पूरी की गई हैं. नए पास्टर ने भी संस्था के निर्देश पर स्थानांतरण होने की बात कही है. उन्होंने कार्यभार नहीं सौंपे जाने और प्रशासनिक बाधाओं का भी जिक्र किया. वित्तीय नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. हालांकि किसी प्रकार के गबन का आरोप लगाने से इनकार किया गया है. विवाद के चलते चर्च समाज में मतभेद की स्थिति बनी हुई है. अब सभी की नजर चर्च प्रबंधन और संबंधित संस्था के अंतिम निर्णय पर टिकी है.
मानसून में आपदा से निपटने प्रशासन अलर्ट
सुकमा. सुकमा जिले में मानसून के दौरान संभावित बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है. कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं. जिला, अनुविभाग और तहसील स्तर पर नोडल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है..किसी भी आपात स्थिति में अधिकारियों को तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू करना होगा. 24 घंटे सक्रिय रहने वाला जिला नियंत्रण कक्ष भी शुरू कर दिया गया है. आपदा की सूचना मिलने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाएगी. नदी-नालों और संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं. राहत और बचाव दलों को भी तैयार रहने को कहा गया है. प्रशासन ने नागरिकों से अफवाहों से बचने और आधिकारिक सूचना पर भरोसा करने की अपील की है. आपदा के समय त्वरित समन्वय के लिए अधिकारियों के संपर्क नंबर भी जारी किए गए हैं. लक्ष्य यह है कि किसी भी प्राकृतिक संकट में जनहानि और नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके. मानसून के पूरे सीजन में प्रशासन लगातार निगरानी बनाए रखेगा.
आपदा से मुकाबले की तैयारी, एनडीआरएफ देगा विशेष प्रशिक्षण
बीजापुर. बीजापुर जिले में आपदा प्रबंधन को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. 20 जुलाई से 1 अगस्त तक राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ विशेष प्रशिक्षण आयोजित करेगा. यह प्रशिक्षण जिले के सभी विकासखंडों में अलग-अलग चरणों में होगा. अधिकारियों, कर्मचारियों और स्थानीय प्रतिनिधियों को राहत एवं बचाव कार्यों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा. बाढ़, अतिवृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की रणनीति सिखाई जाएगी. जिले में अब तक करीब 293 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की जा चुकी है. भैरमगढ़ में सबसे अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है. इसी को देखते हुए प्रशासन ने तैयारियों को और तेज कर दिया है. 24 घंटे सक्रिय नियंत्रण कक्ष भी शुरू कर दिया गया है. आपात स्थिति में आम लोग नियंत्रण कक्ष से सहायता ले सकेंगे. प्रशासन का उद्देश्य आपदा के समय त्वरित और समन्वित राहत सुनिश्चित करना है. यह प्रशिक्षण जिले की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा.
अनुशासनहीनता पर जपं कर्मचारी निलंबित
सुकमा. सुकमा जिले में प्रशासन ने अनुशासनहीनता और अनियमितताओं के मामले में सख्त कार्रवाई की है. जनपद पंचायत के सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. शिकायतें जिला पंचायत की सामान्य सभा में जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई थीं. आरोप है कि स्थानांतरण आदेश के बावजूद संबंधित कर्मचारी ने नए पदस्थापना स्थल पर नियमित कार्यभार नहीं संभाला. इसके बावजूद पुराने कार्यालय में कामकाज जारी रखा गया. जांच में वित्तीय लेन-देन और चेक जारी करने से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं. बार-बार चेतावनी के बावजूद कार्यशैली में सुधार नहीं होने की बात कही गई है. प्रशासन ने इसे सेवा नियमों का उल्लंघन माना है. मामले में विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है. जिले में सुशासन के तहत ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं होगी. यह कार्रवाई सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
राशन दुकान में महिला से मारपीट, कार्रवाई की मांग तेज
जगदलपुर. बस्तर जिले के बकावंड क्षेत्र में राशन दुकान में महिला विक्रेता से मारपीट का मामला सामने आया है. बताया गया कि अंत्योदय कार्ड पर शक्कर उपलब्ध नहीं होने से विवाद शुरू हुआ. महिला विक्रेता ने बताया कि शासन से शक्कर का आवंटन नहीं मिला था. इसी बात पर कथित रूप से गाली-गलौज और मारपीट की गई. घटना की शिकायत पुलिस थाने में दर्ज कराई गई है. मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने पर नाराजगी बढ़ गई है. राशन विक्रेता कल्याण संघ ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है. पीड़ित महिला ने आरोपी की गिरफ्तारी तक दुकान नहीं खोलने की चेतावनी दी है. वहीं ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित राशन दुकान पर समय पर वितरण किया जाता रहा है. पुलिस ने जांच जारी होने और जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया है. घटना के बाद राशन विक्रेताओं की सुरक्षा का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है. अब सभी की नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है.

उगाही करने वाले दो आरोपी गिरफ्तार
कोण्डागांव. कोण्डागांव पुलिस ने मीडिया का नाम लेकर अवैध वसूली करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
मामला एक बीज व्यवसायी से कथित उगाही का बताया जा रहा है. शिकायत के अनुसार बदनाम करने और जेल भिजवाने की धमकी देकर रकम वसूली गई थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीम गठित की. जाल बिछाकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस ने उनके कब्जे से नकदी, मोबाइल और वारदात में प्रयुक्त वाहन जब्त किया है. आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया. पुलिस का कहना है कि कानून की नजर में सभी नागरिक समान हैं. किसी भी सम्मानित पेशे की आड़ लेकर अपराध करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. साथ ही स्पष्ट किया गया कि यह कार्रवाई केवल आरोपियों के खिलाफ है. निष्पक्ष और जिम्मेदार पत्रकारिता की गरिमा को बनाए रखना भी पुलिस की प्राथमिकता है. इस कार्रवाई को कानून के दुरुपयोग पर सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है.
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