सुप्रिया पांडेय, रायपुर। पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम के दिमागी नक्सली होने पर गर्व वाले बयान को लेकर बस्तर शांति समिति ने कड़ी आपत्ति जताई है। समिति ने रायपुर प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता कर चिदंबरम के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण और बस्तरवासियों की भावनाओं को आहत करने वाला बताया। समिति के सदस्यों ने कहा कि बस्तर के लोगों ने दशकों तक नक्सल हिंसा का दंश झेला है। ऐसे में देश के पूर्व गृहमंत्री की ओर से इस तरह का बयान देना उचित नहीं है।
शांति समिति के सदस्यों ने कहा कि बस्तर को नक्सल हिंसा से मुक्त हुए अभी महज पांच महीने का समय हुआ है। इस लंबे संघर्ष में कई परिवारों ने अपने लोगों को खोया है, कई घर उजड़े और बड़ी संख्या में लोगों ने हिंसा का दर्द झेला है। बस्तरवासियों के लिए नक्सलवाद केवल कोई राजनीतिक विचारधारा नहीं, बल्कि उनके जीवन और परिवारों से जुड़ा हुआ गंभीर दर्द है।


समिति ने सवाल उठाया कि बयान देने से पहले क्या पूर्व गृहमंत्री ने कभी बस्तर के उन परिवारों की पीड़ा को महसूस करने की कोशिश की, जिन्होंने नक्सली हिंसा में अपने परिजनों को खोया है? सदस्यों ने कहा कि जिस व्यक्ति ने देश के गृहमंत्री के रूप में आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली हो, उससे ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर अधिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की अपेक्षा की जाती है।
बस्तर शांति समिति ने पी. चिदंबरम से अपने बयान को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। समिति ने चेतावनी दी कि यदि चिदंबरम ने माफी नहीं मांगी तो बस्तर शांति समिति के सदस्य दिल्ली पहुंचकर प्रदर्शन करेंगे। समिति के सदस्यों का कहना है कि बस्तर अब शांति और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में नक्सलवाद को लेकर किसी भी तरह के महिमामंडन या समर्थन वाले बयान से बस्तरवासियों की भावनाएं आहत होती हैं।
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