अजय शास्त्री, बेगूसराय। जिले के चेरिया बरियारपुर थाना क्षेत्र के शाहपुर पंचायत के तरबन्ना चौड़ स्थित एक मकई के खेत से 58 वर्षीय अधेड़ का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। मृतक की पहचान राजेंद्र साह (पिता- रामातार साह) के रूप में हुई है। इस सनसनीखेज वारदात के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

​शव की स्थिति और हत्या की आशंका

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, जब स्थानीय लोग सुबह तरबन्ना चौड़ की तरफ गए, तो उन्होंने मकई के खेत में एक शव देखा, जिसके तुरंत बाद वहां भारी भीड़ जमा हो गई। घटनास्थल के हालात और शव के पास के निशान चीख-चीख कर गवाही दे रहे थे कि हत्या से पहले मृतक के साथ जमकर हाथापाई या संघर्ष हुआ होगा। प्रथम दृष्टया हालात को देखकर यह कयास लगाया जा रहा है कि अपराधियों ने बेरहमी से गला घोंटकर राजेंद्र साह की जान ली है। हालांकि, हत्या के पीछे की असल वजह क्या है और इस घिनौने कृत्य को किन लोगों ने अंजाम दिया है, यह पुलिस की गहन जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह से साफ हो पाएगा।

​पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

​इस पूरी घटना के बाद से स्थानीय लोगों और परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि चेरिया बरियारपुर थाना क्षेत्र की पुलिस गश्ती और निगरानी के मामले में पूरी तरह लापरवाह साबित हो रही है। जिस सुनसान इलाके में अपराधियों ने एक अधेड़ को मौत के घाट उतार दिया और आराम से शव को मकई के खेत में ठिकाने लगाकर फरार हो गए, वहां पुलिस की गश्त नदारद थी। यदि पुलिस की तरफ से क्षेत्र में नियमित और सख्त निगरानी रखी जाती, तो शायद अपराधियों के इतने हौसले बुलंद नहीं होते कि वे दिनदहाड़े या रात के अंधेरे में ऐसी दुस्साहसिक वारदात को बेखौफ होकर अंजाम दे पाते।

​प्रशासनिक कार्रवाई और आगे की जांच

​घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस तुरंत हरकत में आई और दलबल के साथ मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लिया। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले लिया है और उसे कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजने की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे हर एंगल से इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं। फिलहाल, हत्या के असली कारण और इसमें शामिल कातिलों की पहचान का रहस्य अभी भी बरकरार है। अब देखना यह होगा कि बेगूसराय पुलिस कब तक इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाकर कानून के लंबे हाथों तक आरोपियों को पहुंचा पाती है।