अजय शास्त्री, बेगूसराय। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की कार्रवाई लगातार जारी है। निगरानी टीम ने एक सरकारी कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों दबोच लिया है। आपदा राहत योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि के एवज में रिश्वत मांगने वाले सदर अंचल के एक क्लर्क की गिरफ्तारी से भ्रष्ट कर्मियों में भारी हड़कंप मच गया है।

क्या है पूरा मामला?

​विजिलेंस के डीएसपी श्याम बाबू प्रसाद ने मामले की पूरी जानकारी देते हुए बताया कि चांदपूरा निवासी दौलती देवी की पुत्री रानी कुमारी की मृत्यु 3 अक्टूबर 2025 को डूबने की एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना में हो गई थी। इस दुर्घटना के बाद मृतका के परिवार को सरकार की ओर से मिलने वाली आपदा राहत अनुग्रह राशि यानी 4 लाख रुपये का भुगतान किया जाना था।
​इसी सरकारी सहायता राशि के चेक या भुगतान की फाइल को आगे बढ़ाने के बदले सदर अंचल कार्यालय के क्लर्क सोनू कुमार ने पीड़ित परिवार से शुरुआत में 80,000 रुपये की भारी-भरकम मांग की थी। बाद में यह सौदा कम होते-होते 5,000 रुपये पर आ गया और अंत में 4,000 रुपये में रिश्वत की यह डील तय हुई।

​ऐसे बिछाया गया निगरानी का जाल

​पीड़िता दौलती देवी इस अवैध मांग से बेहद परेशान थीं। उन्होंने हार मानने के बजाय इस बात की शिकायत सीधे निगरानी विभाग में दर्ज कराई।
​शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने पूरी गोपनीयता के साथ मामले की आंतरिक और गोपनीय जांच की, जिसमें क्लर्क द्वारा रिश्वत मांगे जाने का यह आरोप बिल्कुल सही पाया गया। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से शुक्रवार को करीब 12 बजे के आसपास अंचल कार्यालय परिसर में एक विशेष जाल बिछाया गया। जैसे ही क्लर्क सोनू कुमार ने परिवादिया से 4,000 रुपये की रिश्वत की रकम अपने हाथ में ली, पहले से मुस्तैद निगरानी टीम ने उसे धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद टीम आरोपी क्लर्क को अपने साथ पूछताछ के लिए सुरक्षित स्थान पर ले गई।

​भ्रष्ट कर्मियों में मचा हड़कंप

​दिनदहाड़े अंचल कार्यालय के अंदर हुई इस कार्रवाई से भ्रष्ट प्रशासनिक कर्मियों और बिचौलियों में भयंकर खलबली मच गई है। आम जनता ने निगरानी विभाग की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई की सराहना की है, जिससे यह संदेश गया है कि सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।