भागलपुर। जिले के सन्हौला अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलती एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहां प्रसव के मात्र चार घंटे बाद एक नवजात शिशु की मौत हो गई। घटना से आक्रोशित परिजनों ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों पर इलाज में घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए डायल-112 की टीम को मौके पर पहुंचना पड़ा।

​शिफ्ट बदलने के चक्कर में उलझा मामला

​धोरैया थाना क्षेत्र के देवडाड निवासी अवधेश कुमार ने अपनी पत्नी सोनम कुमारी (22) को प्रसव पीड़ा होने पर मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे सन्हौला अस्पताल में भर्ती कराया था। परिजनों के अनुसार, शुरुआती जांच में ड्यूटी पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मी ने स्थिति सामान्य बताई थी। लेकिन सुबह 8 बजे शिफ्ट बदलने के बाद मामला बिगड़ गया। नई ड्यूटी पर आई एएनएम (ANM) ने कथित तौर पर अनुभव की कमी और अधिकार क्षेत्र का हवाला देते हुए डिलीवरी कराने में आनाकानी की।

​समय पर नहीं मिला इलाज, आशा कार्यकर्ता के आरोप

​प्रसूता की ननद, जो स्वयं एक आशा कार्यकर्ता हैं, ने बताया कि अस्पताल में डॉक्टर अक्सर अपने केबिन में रहते हैं और प्रसव का पूरा जिम्मा एएनएम के भरोसे छोड़ दिया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय रहते अनुभवी स्टाफ या डॉक्टरों ने ध्यान दिया होता, तो बच्चे को बचाया जा सकता था। परिजनों का कहना है कि उन्होंने मरीज को रेफर करने की गुहार भी लगाई थी, लेकिन उन्हें आश्वासन देकर रोक लिया गया।

​जन्म के बाद थम गई धड़कनें

​दोपहर 12 बजे के बाद महिला ने एक बेटे को जन्म दिया। जन्म के समय शिशु काफी कमजोर था और उसकी धड़कनें धीमी थीं। जब स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई, तब आनन-फानन में डॉ. नूरुल हंसन और डॉ. सरफराज को बुलाया गया। दोनों डॉक्टरों ने काफी देर तक नवजात को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

​प्रशासनिक चुप्पी और आक्रोश

​घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उनका स्पष्ट कहना है कि जो सक्रियता डॉक्टरों ने अंत में दिखाई, अगर वही शुरुआत में दिखाई होती तो बच्चा आज जीवित होता। इस गंभीर मामले पर जब अस्पताल प्रभारी संदीप कुमार दास से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया, जिससे अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर और भी सवाल खड़े हो रहे हैं।