हेमंत शर्मा, इंदौर। राजनीति अक्सर भाषणों, नारों और रैलियों के बीच सिमट कर रह जाती है, लेकिन कभी-कभी कुछ मुलाकातें भावनाओं, उम्मीदों और बीते दौर की यादों का सफर बन जाती हैं। इंदौर में आयोजित कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान एक ऐसी ही दिल को छू लेने वाली कहानी सामने आई। धार जिले से आए करीब 70 वर्षीय बुजुर्ग भागीरथ किशन परमार राहुल गांधी की एक झलक पाने की चाहत में कार्यक्रम स्थल पर पूरे 24 घंटे पहले ही पहुंच गए थे।

राहुल गांधी के लिए कार्यक्रम स्थल पर गुजारी रात

धार के रहने वाले भागीरथ परमार के लिए यह सिर्फ एक राजनीतिक आयोजन नहीं, बल्कि उनके जीवन का एक भावनात्मक सफर था। राहुल गांधी को देखने और उनकी आवाज सुनने की तड़प इतनी गहरी थी कि उन्होंने पूरी रात कार्यक्रम स्थल पर ही गुजार दी। उम्र का तकाजा और लंबा इंतजार भी उनके चेहरे की उम्मीद और हौसले को डिगा नहीं सका।

‘राहुल गांधी में दिखती है इंदिरा गांधी की झलक’

भागीरथ परमार ने बताया कि वह लंबे समय से कांग्रेस की विचारधारा से जुड़े रहे हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से मुलाकात का संस्मरण साझा करते हुए कहा कि जब वह राहुल गांधी को देखते हैं, तो उन्हें उनमें अपनी नेत्री इंदिरा गांधी की ही झलक नजर आती है। इसके अलावा, उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा देश में कंप्यूटर क्रांति की शुरुआत के दौर को याद किया और कहा कि आज की युवा पीढ़ी जिस डिजिटल इंडिया की बात करती है, उसकी बुनियाद राजीव गांधी के दौर में ही रखी गई थी।

राजीव गांधी और कंप्यूटर की याद, डिजिटल इंडिया से जोड़ा रिश्ता

भागीरथ परमार ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस दौर को भी याद किया, जब देश में कंप्यूटर के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा था। उनका कहना है कि आज की युवा पीढ़ी जिस डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ रही है, उसकी शुरुआती नींव से जुड़ी यादें उन्हें राजीव गांधी के समय की याद दिलाती हैं।उनके लिए राहुल गांधी सिर्फ वर्तमान के एक नेता नहीं, बल्कि एक ऐसे राजनीतिक परिवार की अगली पीढ़ी हैं, जिससे उनकी पुरानी यादें और भावनाएं जुड़ी हुई हैं।

‘राहुल को देख लूं, फिर मौत भी आ जाए तो दुख नहीं’

अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए 70 वर्षीय भागीरथ ने भावुक शब्दों में कहा, “मैं बस एक बार राहुल गांधी को करीब से देखना चाहता था। अगर उन्हें एक बार देख लूं, उसके बाद जीवन में मौत भी आ जाए तो मुझे कोई मलाल नहीं रहेगा।” जीवन के इस पड़ाव पर एक नेता के प्रति यह निष्ठा राजनीतिक औपचारिकताओं से परे उनके निजी जुड़ाव को दर्शाती है।

प्रत्यक्ष झलक नहीं मिली, लेकिन आवाज सुनकर पाई शांति

भीड़ और मंच की दूरी के कारण भागीरथ परमार को राहुल गांधी की प्रत्यक्ष झलक तो नसीब नहीं हो सकी, लेकिन लाउडस्पीकर के माध्यम से राहुल गांधी का संबोधन और उनकी आवाज सुनकर उन्होंने संतोष व्यक्त किया। एक बुजुर्ग की आंखों में राहुल गांधी को देखने की आस, दिल में इंदिरा गांधी की यादें और जुबां पर राजीव गांधी के दौर का जिक्र इंदौर के इस कार्यक्रम में भागीरथ की कहानी पीढ़ियों के अटूट जुड़ाव का प्रतीक बन गई।

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