प्रयागराज के कुंडा में 2013 में हुए सीओ जियाउल हक हत्याकांड मामले में लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने 19 सितंबर 2026 को सीबीआई की फाइनल रिपोर्ट स्वीकार कर ली. अदालत ने रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के खिलाफ आगे कार्रवाई की मांग खारिज कर दी.
लखनऊ/प्रतापगढ़: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कुंडा में वर्ष 2013 में हुए सीओ जियाउल हक हत्याकांड मामले में पूर्व मंत्री और कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को अदालत से राहत मिली है. लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने 19 सितंबर 2026 को मामले की दोबारा जांच के बाद सीबीआई की ओर से दाखिल फाइनल रिपोर्ट स्वीकार कर ली.
अदालत ने राजा भैया के खिलाफ आगे कार्रवाई किए जाने की मांग भी खारिज कर दी. सीबीआई की दोबारा जांच में उनके खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात सामने आई थी.
पत्नी ने की थी मांग
जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद ने पहले दाखिल सीबीआई क्लोजर रिपोर्ट पर आपत्ति जताई थी. उन्होंने राजा भैया समेत कुछ अन्य लोगों की भूमिका की दोबारा जांच की मांग की थी, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने राजा भैया की भूमिका समेत उन पहलुओं की फिर से जांच की, जिन पर परवीन आजाद की ओर से सवाल उठाए गए थे. दोबारा जांच पूरी होने के बाद एजेंसी ने फिर फाइनल रिपोर्ट दाखिल की.
2013 में हुई थी हत्या
मामला 2 मार्च 2013 का है. प्रतापगढ़ के कुंडा क्षेत्र के बलीपुर गांव में प्रधान नन्हे यादव की हत्या के बाद उत्पन्न तनावपूर्ण स्थिति को संभालने पहुंचे तत्कालीन सीओ जियाउल हक की हत्या कर दी गई थी. इसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी.
जियाउल हक की पत्नी की शिकायत में राजा भैया समेत कुछ अन्य लोगों को नामजद किया गया था. शुरुआती जांच के बाद सीबीआई ने राजा भैया और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात कहते हुए फाइनल रिपोर्ट दाखिल की थी. बाद में इसी रिपोर्ट को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दोबारा जांच हुई.
10 आरोपियों को उम्रकैद
इस मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने अक्टूबर 2024 में 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था और बाद में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई. दोषी ठहराए गए आरोपियों में फूलचंद यादव, पवन यादव, मंजीत यादव, घनश्याम सरोज, राम लखन गौतम, छोटेलाल यादव, राम आसरे, मुन्ना पटेल, शिवराम पासी और जगत बहादुर पाल उर्फ बुल्ले पाल शामिल हैं.
वहीं, आरोपी सुधीर यादव को साक्ष्यों के अभाव में बरी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है. राजा भैया से संबंधित आज का अदालत का आदेश उनकी भूमिका को लेकर हुई दोबारा जांच और सीबीआई की फाइनल रिपोर्ट तक सीमित है.



