SIR के जरिए वोट काटने का लगाया आरोप, बोले- लोकतंत्र की रक्षा के लिए आगे आ रहे युवाओं को प्रदर्शन की अनुमति मिलनी चाहिए

नई दिल्ली/चंडीगढ़। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को इस कार्रवाई को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले छात्रों को रोकने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान मान ने राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन को देखते हुए करीब 80 हजार से 90 हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे छात्र निहत्थे थे और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर अपनी आवाज उठाना चाहते थे।

मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर भी केंद्र सरकार और निर्वाचन व्यवस्था पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में कुछ मतदाताओं के नाम हटाए गए, जबकि कुछ पसंदीदा मतदाताओं के नाम सूची में बने रहे।

मान ने निर्वाचन आयोग के दो सदस्यों का हवाला देते हुए दावा किया कि उनसे संबंधित निर्णयों के बारे में परामर्श नहीं किया गया था। उनके अनुसार, मतदाता सूची में कथित बदलाव और निर्णय प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवाल लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।

हालांकि, मतदाता सूची में हेरफेर और निर्वाचन आयोग के सदस्यों से परामर्श नहीं किए जाने संबंधी दावे मुख्यमंत्री के आरोप हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों और निर्वाचन आयोग के पक्ष को देखना जरूरी है।

युवाओं के प्रदर्शन पर रोक को लेकर केंद्र से सवाल

भगवंत मान ने कहा कि यदि छात्र और युवा लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए अपनी बात रखना चाहते हैं, तो उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से ऐसा करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि केंद्र सरकार को जंतर-मंतर पर होने वाले विरोध प्रदर्शन से परेशानी क्यों है।

मुख्यमंत्री ने दिल्ली में सुरक्षा के इंतजामों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पूरी राजधानी को किले में बदल दिया गया है। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।

करीब 500 प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए

दिल्ली पुलिस ने शनिवार को जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे करीब 500 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। ये लोग मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे।

पुलिस के अनुसार, सुरक्षा संबंधी चिंताओं और आवश्यक प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बाद प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे लोगों को हिरासत में लिया गया।

SIR और फॉर्म-6 को लेकर विरोध

कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में कथित हेरफेर और मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फॉर्म-6 से संबंधित बदलावों के विरोध में प्रदर्शन का आह्वान किया था।

पार्टी ने इन मुद्दों को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आवाज उठाने की घोषणा की थी। अब प्रदर्शनकारियों की हिरासत, मतदाता सूची की प्रक्रिया और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।