अजय सैनी, भिवानी। नीट-यूजी परीक्षा में कथित धांधली, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की भूमिका और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर भारतीय विद्यार्थी मोर्चा और भारत मुक्ति मोर्चा ने विरोध जताया। भारतीय विद्यार्थी मोर्चा की जिला संयोजक अंजू के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं और विद्यार्थियों ने वीरवार को भिवानी उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम 11 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
सिर्फ शिक्षा मंत्री का इस्तीफा काफी नहीं: अंजू
जिला संयोजक अंजू ने कहा कि नीट-यूजी में सामने आई अनियमितताओं और पेपर लीक के मामले का समाधान केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से नहीं होगा। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों और षड्यंत्रकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों मेहनत करते हैं, लेकिन परीक्षा व्यवस्था में लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक चिकित्सा प्रवेश परीक्षा का संचालन एआईआईएमएस की निगरानी में पारदर्शी तरीके से कराने की व्यवस्था नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
जंतर-मंतर पर छात्रों पर कार्रवाई का विरोध
अंजू ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर पुलिस कार्रवाई और दर्ज मुकदमों पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रही छात्राओं के साथ पुलिस ने दुर्व्यवहार किया।
संगठन ने आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने और छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार के आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति की समीक्षा की मांग
अंजू ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को शिक्षा के निजीकरण और व्यापारीकरण का जरिया बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालय बंद होने और गरीब तथा वंचित वर्ग के विद्यार्थियों में ड्रॉपआउट बढ़ने जैसी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।
संगठन ने पूरे देश में समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने और विद्यार्थियों के लिए एक समान तथा न्यायसंगत शुल्क नीति तय करने की मांग की। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की करीब 52 प्रतिशत सीटों में कटौती को भी युवाओं के साथ अन्याय बताया।
11 सूत्रीय मांगों में ये मुद्दे शामिल
ज्ञापन में ईवीएम व्यवस्था में आवश्यक सुधार और चुनाव प्रणाली को पारदर्शी बनाने की मांग की गई। इसके अलावा नीट की समीक्षा कर इसे एनटीए के बजाय एआईआईएमएस की निगरानी में पारदर्शी तरीके से कराने की मांग उठाई गई।
संगठन ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने, छात्राओं से दुर्व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई, राष्ट्रीय शिक्षा नीति की समीक्षा और एनटीए की कार्यप्रणाली की गहन जांच की मांग की।
इसके साथ ही नीट, एसएससी सीजीएल समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कार्रवाई, 2011 से पहले नियुक्त अध्यापकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता खत्म करने और केंद्र व राज्य सरकारों के विभागों में खाली पदों पर नियमित भर्ती शुरू करने की मांग की गई।
ज्ञापन में शिक्षण संस्थानों और आंदोलनों में छात्राओं के शोषण पर रोक, उनकी सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था, देशभर में समान शिक्षा प्रणाली, न्यायसंगत शुल्क नीति और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में यूजी-पीजी की काटी गई 52 प्रतिशत सीटें बहाल करने की मांग भी शामिल रही।
मांगें नहीं मानीं तो बड़े आंदोलन की चेतावनी
ज्ञापन सौंपने के दौरान बीवीएम और बीएमएम के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि राष्ट्रपति और सरकार ने 11 सूत्रीय मांगों पर जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो युवा समाज बड़े राष्ट्रीय आंदोलन के लिए मजबूर होगा। संगठन ने कहा कि इसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
इस दौरान आकाश, जिला सचिव भारतीय विद्यार्थी मोर्चा भिवानी, खजान, जिला महासचिव भारतीय विद्यार्थी मोर्चा भिवानी, राजीव सैनी, जिला संयोजक राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा भिवानी, दीपक जांगड़ा, जिला अध्यक्ष राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा भिवानी, सतेन्द्र पपोसा, अध्यक्ष बहुजन मुक्ति पार्टी बवानीखेड़ा, कृष्ण सांगा, जिला अध्यक्ष राष्ट्रीय पेंशनर संघ भिवानी, बाबू लाल, जिला महासचिव राष्ट्रीय मूलनिवासी पेंशनर संघ भिवानी, रामकुमार, जिला अध्यक्ष बीवीएफ भिवानी, पुरुषोत्तम सैनी, हवासिंह भारत मुक्ति मोर्चा सहित अन्य मौजूद रहे।
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