अहमदाबाद। गुजरात के भरूच स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद को जैन विहार बताने और वहां जैन श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना की अनुमति देने की मांग को लेकर गुजरात हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और गुजरात सरकार को नोटिस जारी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

प्रसिद्ध वकील हरिशंकर जैन, राहुल दीवान और तीन अन्य लोगों द्वारा दायर इस याचिका में दावा किया गया है कि ASI के संरक्षण में मौजूद इस ऐतिहासिक ढाँचे के तहखाने में जैन धर्म के 17वें तीर्थंकर भगवान मल्लिनाथ और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के अवशेष मौजूद हैं। याचिकाकर्ताओं ने अल्लाउद्दीन खिलजी के ऐतिहासिक आक्रमण का हवाला देते हुए अपने दावों की पुष्टि करने का प्रयास किया है। साथ ही, धार के चर्चित भोजशाला मामले के फैसले के आधार पर इस मस्जिद पर जैन समाज का अधिकार जताया गया है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि 1909 के गजट में पहली बार इसे जामा मस्जिद के रूप में दर्ज किया गया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए गुजरात हाईकोर्ट ने ASI को मस्जिद परिसर की जांच कर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 13 अक्टूबर की तारीख तय की है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को आश्वस्त किया है कि यदि ASI को कानून-व्यवस्था बनाए रखने या प्रतिमाओं के अवशेषों की सुरक्षा के लिए किसी भी तरह की सहायता की आवश्यकता होगी, तो सरकार पूरी तरह सहयोग करने के लिए तैयार है। बताया जा रहा है कि प्राथमिक जांच में ASI ने भी परिसर में मूर्तियों के अवशेष होने की संभावना को स्वीकार किया है।

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