अजय सैनी, भिवानी. हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन तृप्ति श्योराण ने शनिवार को भिवानी स्थित बाल आश्रम का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ जिला बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) भिवानी के चेयरमैन अधिवक्ता प्रदीप सिंह तंवर भी साथ रहे। इस औचक निरीक्षण का उद्देश्य आश्रम में रह रहे बच्चों के रहन-सहन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की जमीनी हकीकत जानना था।
निरीक्षण के दौरान जहां साफ-सफाई और भोजन की व्यवस्था संतोषजनक पाई गई, वहीं बच्चों के स्कूल दाखिले और दैनिक उपयोग की वस्तुओं से जुड़ी कुछ गंभीर कमियां भी सामने आईं, जिन्हें तुरंत दूर करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
निरीक्षण के दौरान यह बात सामने आई कि शैक्षणिक परिणाम घोषित होने के तीन महीने बीत जाने के बाद भी बाल आश्रम की बच्चियों का किसी स्कूल में दाखिला नहीं करवाया गया है। इसे बच्चों के शिक्षा के अधिकार के प्रति एक बड़ी लापरवाही मानते हुए चेयरपर्सन ने गहरी चिंता व्यक्त की। इसके साथ ही बच्चियों की दैनिक उपयोग की वस्तुओं की उपलब्धता में भी कुछ खामियां मिलीं। इन कमियों पर तुरंत कड़ा संज्ञान लेते हुए चेयरपर्सन तृप्ति श्योराण ने आश्रम प्रबंधन को निर्देश दिए कि बिना समय गंवाए बच्चों का दाखिला नजदीकी स्कूलों में सुनिश्चित किया जाए और उनकी जरूरतों का हर सामान तुरंत मुहैया कराया जाए।
एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि निरीक्षण के दौरान बाल आश्रम परिसर में साफ-सफाई की स्थिति बेहतर पाई गई। इसके साथ ही बच्चों के लिए तैयार होने वाले भोजन और पीने के पानी की व्यवस्था भी मानकों के अनुरूप ठीक मिली, जिसके लिए अधिकारियों ने संबंधित स्टाफ के प्रयासों को सराहा।
इस मौके पर हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन तृप्ति श्योराण ने कहा कि बाल आश्रम में जो भी कमियां पाई गई हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से दुरुस्त करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। हमारा एकमात्र और स्पष्ट प्रयास यह है कि इन बच्चों को घर जैसा माहौल और हर जरूरी सुविधा मिले।

उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत तौर पर एक विशेष योजना की निगरानी कर रही हूं, जिसके तहत 14 से 18 वर्ष तक के किशोर-किशोरियों को अनाथालयों में स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग दी जा सके। इसका मकसद यह है कि ये बच्चे बड़े होकर पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकें और समाज में पूरे सम्मान के साथ अपना जीवन जी सकें। बच्चों से जुड़ी किसी भी समस्या के त्वरित समाधान के लिए आयोग हमेशा तत्पर और प्रयासरत रहेगा।
इस मौके पर जिला बाल कल्याण समिति भिवानी के चेयरमैन अधिवक्ता प्रदीप सिंह तंवर ने भी आश्रम प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि बच्चों की शिक्षा और उनकी दैनिक जरूरतों के मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समिति लगातार ऐसे औचक निरीक्षण जारी रखेगी ताकि सुधारों को धरातल पर लागू किया जा सके।
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