हेमंत शर्मा, इंदौर। एमपी के इंदौर की सियासत में पारा एक बार फिर उबल रहा है, और इस बार वजह बनी है पंढरीनाथ थाने की वो 5 घंटे की ‘स्पेशल क्लास’, जिसने पूरे शहर के राजनीतिक माहौल में मिर्ची लगा दी है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे को पुलिस ने पूछताछ के लिए क्या बुलाया, थाने के बाहर मानो भूचाल आ गया।

275 सवाल… या सीधी प्रताड़ना?

फरवरी में गांधी भवन (कांग्रेस कार्यालय) पर हुए पथराव के मामले में पुलिस को अचानक चिंटू चौकसे की याद आई। लेकिन 5 घंटे में पुलिस ने क्या पूछा? कांग्रेसियों की मानें तो पुलिस की डायरी में 275 सवालों का जखीरा था—”कहाँ जन्मे?”, “पढ़ाई कहाँ तक हुई?”, “पार्टी में कब से हो?” अब सवाल यह उठता है कि क्या पथराव की जांच के लिए चिंटू चौकसे का जन्म प्रमाणपत्र और नर्सरी की मार्कशीट चेक करना ज़रूरी था? या फिर यह सिर्फ चार-पांच घंटे तक थाने में बैठाकर “मेंटल टॉर्चर” करने का सुनियोजित प्लान था?

छात्र आंदोलन की ‘खुन्नस’ उतार रही भाजपा?

चिंटू चौकसे ने सीधे-सीधे भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह सब भंवरकुआं में हुए छात्र आंदोलन का “इनाम” है। युवाओं और छात्रों की आवाज़ उठाने की कीमत चुकाई जा रही है। वहीं, थाने का घेराव करने पहुंचे पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा का पारा भी हाई दिखा। उन्होंने पुलिस को सीधी चेतावनी दी कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। जांच के नाम पर बेवजह किसी को बिठाकर रखना निष्पक्षता नहीं, बल्कि ‘राजनीतिक गुलामी’ है।

पुलिस की वही घिसी-पिटी दलील

दूसरी तरफ, एसीपी सराफा यश भिजोरिया का कहना वही रटा-रटाया है- “नियमानुसार बयान लिए गए हैं, जांच जारी है।”लेकिन शहर की जनता सब समझ रही है कि जब खाकी पर खादी का शिकंजा कसता है, तो नियम-कायदे किसके इशारों पर नाचते हैं।

बड़ा सवाल यह है कि क्या इंदौर पुलिस वाकई फरवरी के पथराव का सच सामने लाना चाहती है, या फिर यह सिर्फ विपक्ष की आवाज़ दबाने के लिए रचा गया एक ‘पॉलीटिकल ड्रामा’ है? मामला जो भी हो, इस 5 घंटे की पूछताछ ने इंदौर में कांग्रेस को एक बार फिर सड़कों पर ला खड़ा किया है।

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