चंडीगढ़। हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत वर्ष 2023 के चर्चित रिश्वत मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) भिवानी के तत्कालीन प्राचार्य अनिल कुमार यादव को 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के मामले में न्यायालय ने 5 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) की प्रभावी जांच और सशक्त पैरवी के बाद आया।

यह मामला वर्ष 2023 का है। उस समय राज्य चौकसी ब्यूरो (अब SV&ACB) ने भिवानी के सरकारी आईटीआई में छापेमारी कर तत्कालीन प्राचार्य अनिल कुमार यादव को 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।

हर कर्मचारी से वसूले जाते थे 2-2 हजार रुपये

जांच के अनुसार, प्राचार्य हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के तहत कार्यरत कर्मचारियों से नौकरी में बनाए रखने के नाम पर प्रति कर्मचारी हर महीने दो हजार रुपये की अवैध वसूली करता था। शिकायत में बताया गया था कि छह कर्मचारियों से कुल 12 हजार रुपये की मांग की जा रही थी और पैसे नहीं देने पर कार्रवाई की धमकी दी जाती थी।

इस संबंध में HKRN के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी विकास कुमार ने राज्य चौकसी ब्यूरो, हिसार को शिकायत दी। शिकायत के सत्यापन के बाद ब्यूरो ने ट्रैप की योजना बनाई।

रेस्ट हाउस में रिश्वत लेते ही दबोचा

तत्कालीन निरीक्षक अजीत गिल के नेतृत्व में विजिलेंस टीम ने विकास कुमार को रासायनिक पाउडर लगे 12 हजार रुपये देकर आईटीआई परिसर स्थित रेस्ट हाउस भेजा। जैसे ही प्राचार्य अनिल कुमार यादव ने रुपये लेकर उन्हें अपनी जेब में रखा, टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे पकड़ लिया।

हाथ और जेब धुलवाने पर दोनों का रंग गुलाबी हो गया, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई। इसके बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

प्रभावी जांच और पैरवी के बाद सजा

करीब तीन वर्ष तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 5 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। इस फैसले को हरियाणा में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई और प्रभावी अभियोजन का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।