मुजफ्फरपुर। भोजपुर के कोईलवर थाना क्षेत्र से 19,200 कारतूस और हथियारों के साथ पकड़े गए अंतरराज्यीय तस्कर चंदन तिवारी की जड़ें मुजफ्फरपुर तक फैली हैं। सीवान का रहने वाला चंदन पिछले 10 साल से मुजफ्फरपुर में सक्रिय था। वह पीजी-3 हॉस्टल में रहकर लॉ की पढ़ाई की आड़ में हथियारों का बड़ा नेटवर्क चला रहा था। इस अवैध धंधे में उसका छोटा भाई अभिषेक तिवारी उर्फ भोला तिवारी भी उसका मुख्य मददगार था।

​यूपी से लाई जा रही थी हथियारों की भारी खेप

​2 नवंबर को एसटीएफ और भोजपुर पुलिस ने कुल्हड़िया टोल प्लाजा के पास एक एसयूवी से चंदन तिवारी, सारस कुमार और लल्टू कुमार को गिरफ्तार किया था। वाहन की डिक्की और टोकरी में काले पॉलीथिन में छिपाकर 19,200 कारतूस, एक पिस्टल और अन्य सामान ले जाया जा रहा था। यह खेप उत्तर प्रदेश के बदायूं से लाकर बिहार के विभिन्न जिलों में सप्लाई की जानी थी।

​छोटे भाई और अपराधियों से जुड़ा नेटवर्क

​चंदन इस नेटवर्क का मास्टरमाइंड था, जबकि सप्लाई का जिम्मा उसके भाई अभिषेक के पास था। अभिषेक पहले भी काजी मोहम्मदपुर और मनियारी थाना क्षेत्रों में भारी मात्रा में कारतूस और पिस्टल के साथ पकड़ा जा चुका है। इसके अलावा, कच्ची-पक्की से गिरफ्तार आदित्य रंजन ने भी पूछताछ में स्वीकार किया था कि उसे चंदन और अभिषेक ही हथियार उपलब्ध कराते थे।

​एमपीएस कॉलेज से लॉ कॉलेज तक का सफर

​पुलिस जांच में सामने आया है कि चंदन ने मुजफ्फरपुर के एमपीएस साइंस कॉलेज से एनसीसी की थी और बाद में एसकेजे लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई करने लगा। हॉस्टल की आड़ में वह आपराधिक तत्वों के संपर्क में आया और बिहार के कई जिलों में हथियारों की तस्करी का जाल फैला दिया।

​यूपी और हरियाणा तक फैली जांच की आंच

​इस मामले की जांच अब बिहार से बाहर उत्तर प्रदेश और हरियाणा तक पहुंच गई है। पुलिस पूछताछ में यूपी के बदायूं निवासी मुन्ना अंसारी का नाम सामने आया है, जिससे कारतूस खरीदे जाते थे। इस नेटवर्क के तार हरियाणा में 25,000 कारतूस के साथ हुई पांच लोगों की गिरफ्तारी से भी जुड़ रहे हैं, जिससे पुलिस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश करने में जुटी है।