शब्बीर अहमद, भोपाल/रेणु अग्रवाल, धार। मध्य प्रदेश के धार जिले के ऐतिहासिक और बहुचर्चित भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने इस संवेदनशील मामले पर सुनवाई करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।

माननीय अदालत ने जहां एक तरफ भोजशाला परिसर में हिंदू पक्ष की दैनिक पूजा-अर्चना को निर्बाध रूप से जारी रखने की अनुमति दी है वहीं परिसर के भीतर मुस्लिम पक्ष को नमाज अदा करने की इजाजत देने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं इस फैसले पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य व कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिए ये बड़े निर्देश

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के प्रदेश उपाध्यक्ष और भोजशाला मामले के याचिकाकर्ता आशीष गोयल के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने निर्देश जारी किए हैं:

मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक स्थान: मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया गया है कि वे मुस्लिम पक्ष को जुमे की नमाज अदा करने के लिए दोपहर 1 से 3 बजे के बीच भोजशाला के समीप ही कोई वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराएं।

भोजशाला में नमाज की अनुमति नहीं: कोर्ट ने मुख्य भोजशाला परिसर के भीतर मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने की अनुमति देने से स्पष्ट इनकार कर दिया है।

हिंदू पक्ष की पूजा पर रोक नहीं: भोजशाला परिसर में हिंदू पक्ष द्वारा की जा रही पूजा पर कोई रोक नहीं होगी। प्रतिदिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक निरंतर पूजा-अर्चना जारी रहेगी।

हाई कोर्ट के फैसले पर स्टे से इनकार: हिंदू पक्ष के हित में हाई कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए फैसले पर किसी भी तरह का प्रतिबंध लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया है।

मूल ढांचे में बदलाव पर रोक: न्यायालय की अनुमति के बगैर एएसआई मां सरस्वती मंदिर भोजशाला के मूल ढांचे में कोई भी भौतिक परिवर्तन नहीं करेगा।

सभी पक्षों को नोटिस: कोर्ट ने मामले से जुड़े सभी पक्षों को औपचारिक नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं।

अंतिम सुनवाई: मामले की अंतिम बहस और अगली सुनवाई अब से 3 सप्ताह बाद नियत की गई है।

दोनों पक्षों के दिग्गज वकीलों ने दी दलीलें

इस हाई-प्रोफाइल मामले में देश के दिग्गज कानूनविदों ने पैरवी की। मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुज़ैफा अहमदी, अभिषेक मनु सिंघवी और सलमान खुर्शीद ने पक्ष रखा। केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उपस्थित रहे और मध्य प्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने पैरवी की।

वहीं हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विनय जोशी, रंजीत कुमार और सी. एस. वैद्यनाथन ने मजबूती से पक्ष रखा। इस मामले में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट रंजना अग्निहोत्री और उनके साथियों को प्रतिवादी बनाया गया है।

‘हमने वैकल्पिक जगह नहीं मांगी, हमें इंसाफ की उम्मीद’ – विधायक आरिफ मसूद

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर भोपाल से कांग्रेस विधायक और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य आरिफ मसूद ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। आरिफ मसूद का कहना है कि हमने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर मांग की थी कि मुसलमानों को पहले की तरह ही वहां नमाज पढ़ने की इजाजत दी जाए। हमने अपनी याचिका में कहीं भी नमाज के लिए किसी वैकल्पिक जगह की मांग नहीं की थी। हमारा दावा शुरू से यही है कि वह जगह ‘मस्जिद कमाल मौला’ की है। इसी दावे को लेकर हम पहले इंदौर हाई कोर्ट गए थे और अब सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं।

विधायक आरिफ मसूद ने आगे कहा कि अभी कोर्ट का केवल मौखिक रुख सामने आया है, उन्हें लिखित आदेश मिलना बाकी है। उन्होंने समाज और सभी पक्षों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि अंतिम आदेश आने तक हमें सब्र रखना चाहिए। हमें देश की सर्वोच्च अदालत पर पूरा भरोसा है और उम्मीद है कि अंतिम फैसला काफी बेहतर और इंसाफ पसंद होगा।

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